कोरोना की तीसरी लहर से घबराए श्रमिको की घर वापसी में इजाफा

कोरोना की तीसरी लहर से घबराए श्रमिको की घर वापसी में इजाफा

सागर कुमार, चम्पारण टुडे,,

 ब्यूरो प्रभारी, सीतामढ़ी :- 

सीतामढ़ी :- कोरोना की तीसरी लहर को भांपते हुए जिला प्रशासन हुए शख्त, वही रेल प्रशासन हुआ नर्म। स्थानीय रेलवे स्टेशन के पालेटफार्म पर कई जगहों पर उड़ते दिखे धज्जियां।

बतादें कोरोना की तीसरी लहर की आहट के साथ ही जहां देश, प्रदेश में काम करने वाले श्रमिक एकबार फिर पलायन की ओर बढ़ने लगे है। जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। शनिवार को स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंचाने वाली हावड़ा - रक्सौल तथा हैदराबाद - रक्सौल ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा देखा गया। इस क्षेत्र के प्रवासी मजदूर लगातार घर वापसी कर रहे हैं। पिछले 24 घंटे में अपने गंतव्य से पांच सौ से ज्यादा मजदूर ट्रेन से घर लौटे हैं। इनमें से कई परिवारों के पास पहली और दूसरी लहर की दर्दनाक यादें हैं।

हैदराबाद प्रसंग नगर में रहने वाले साकेत कुमार, सोमेश रामपाल के चार बच्चे हैं। मार्च 2020 में आई कोरोना की पहली लहर की कुछ दर्दनाक यादें आज भी उनके जेहन में सब कुछ व्यय करती दिखतीहैं। जब अचानक हुए लॉकडाउन ने उन्हें हैदराबाद के प्रसंग नगर में बिना काम के फंसा दिया था। ट्रांसपोर्टेशन बंद होने की वजह से वह लगातार 26 दिन अपने परिवार के साथ पैदल चलकर अपने गांव पहुंचे थे। राजमिस्त्री का काम करने वाले साकेत कुमार और सोमेश राजपाल इसबार कोरोना की तीसरी लहर की आहट महसूस करते जी कोई चांस नहीं लिया। जैसे ही टीवी पर दिल्ली, मुंबई तथा अन्य महानगरी में कोरोना मरीजों की संख्या हजारो के पार जाने लगी, साकेत और सोमेश रामपाल ने वापस जाने का फैसला किया।

प्रवासी मजदूरों को लेकर आ रहीं ट्रेनें :-

शनिवार को नेपाल बार्डर से सटे भारतीय क्षेत्र के भिठ्ठ के रहने वाले साकेत और सोमेश रामपाल हैदराबाद से 17005 साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन से अपने घर की ओर सपरिवार चल दिए। उन्होंने कहा, 'मैं इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता था। देश के कई महानगरों में सरकार की गाइड लाइन को देख हम लोग घर चल दिए है। वैसे भी और बीते कुछ दिनों से कोई काम नहीं था। इसलिए हमने घर वापस जाने का फैसला किया।हावड़ा के रहने वाले श्यामलाल कुशवाह ने कहा कि वह भी अपने परिवार के साथ उसी 13043 ट्रेन से लौटे है।

पहली लहर में पैदल घर लौटे थे हजारों मजदूर :-

2020 में कोरोना की वजह से शुरू हुए श्रमिकों के पलायन के दौरान, दो लाख से अधिक मजदूर और करीब तीन लाख फैमिली मेंबर्स हैदराबाद और कोलकाता से लौटे थे अपने घर। भीषण गर्मी में सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर हजारों की संख्या में ये लोग घर पहुंचे थे। हर तरफ अफरा तफरी की माहौल कायम हो चुकी थी। इस कोरोना की और में लोगो ने खूब राजनीतिक फराटा सेंक थे।

स्थानीय रेलवे स्टेशन के कई जगहों पर कोरोना गाइड लाइन की उड़ती दिखी धज्जियां :-

 इस दौरान स्थानीय रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर टिकट लेते लोग कोरोना महामारी से एक दम बेखौफ दिखे। लोग क्रमबद्ध तरीके तथा आपसी दूरी से अनजान बिना मास्क को टिकट लेते दिखे। इस दौरान रेलवे प्रशासनिक टीम से एक भी व्यक्ति नही दिखे जो रेलवे रिजर्वेशन काउंटर के बाहर लोगो को कोरोना की गाइड लाइन को याद दिलाते हुए उन्हें टिकट लेने दे। रेलवे स्टेशन पर संचार यत्र होने के बाबजूद यात्रियों के बीच किसी तरह की कोरोन को लेकर कोई भी गाइड लाइन नहीं दी जा रही थी। ताकि लोग सुन कर अपनी अपनी मास्क लगावे तथा अपनी आपसी दूरी बना कर रह सके।