एईएस को लेकर जारी हुआ जागरूकता कैलेंडर, मंगलवार तक भौतिक सत्यापन कर वाहनों के टैगिंग का निर्देश

एईएस पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। जिला स्वास्थ्य समिति ने इससे बचाव और सावधानियों को लेकर जागरूकता कैलेंडर जारी किया है जो पूरे गर्मी के मौसम में जुलाई तक कार्यान्वित रहेगा। एईएस के नोडल सह वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदा...............

एईएस को लेकर जारी हुआ जागरूकता कैलेंडर, मंगलवार तक भौतिक सत्यापन कर वाहनों के टैगिंग का निर्देश

मुजफ्फरपुर। 27 फरवरी

एईएस पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। जिला स्वास्थ्य समिति ने इससे बचाव और सावधानियों  को लेकर जागरूकता कैलेंडर जारी किया है जो पूरे गर्मी के मौसम में जुलाई तक कार्यान्वित रहेगा। एईएस के नोडल सह वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सतीश ने बताया कि  पूरे फरवरी और मार्च माह में मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके प्रचार प्रसार के सभी माध्यम से यथा होर्डिंग्स, बैनर, फ्लेक्स,  हैंडबिल, पम्पलेट, दीवार लेखन, स्टीकर, स्लोगन, निबंध, नुक्कड़ नाटक, प्रचार वाहन, रेडियो, माइकिंग आदि से जनमानस के बीच एईएस से बचने को  व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त संभावित प्रभावित पंचायतों को किसी न किसी एक पदाधिकारी द्वारा गोद लेकर वहां लोगों के बीच एईएस पर जागरूकता फैलाई जाएगी। जिले में  कांटी, बोचहा, मुशहरी, मीनापुर, मोतीपुर आदि प्रखंड एईएस से सबसे अधिक प्रभावित रहा है। 

मंगलवार तक टैग वाहनों का हो भौतिक सत्यापन

जिला भीबीडीसी पदाधिकारी ने सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र लिखकर यह निर्देश दिया है कि प्रत्येक वार्ड में दो वाहनों की टैगिंग व उनका भौतिक सत्यापन कर मंगलवार तक रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध करा दें।

ओआरएस के घोल को 24 घंटे के बाद नहीं करें इस्तेमाल

मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति में जिले के सभी सामुदायिक उत्प्रेरक के उन्मुखीकरण के दौरान अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुभाष प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें आशा द्वारा चमकी के प्रति जागरूकता और आशा के पोषक क्षेत्र में कुपोषित बच्चों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बीसीएम से कहा कि आशा को चमकी के लक्षण और चमकी में ध्यान देने वाली बातें और चमकी के दौरान “क्या करें और क्या न करें”  के बारे में भी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएँ । उन्हें उचित आईसी मैटेरियल भी उपलब्ध कराया जाए।  वहीं डॉ सतीश कुमार ने कहा कि बच्चों को दी जाने वाली ओआरएस के घोल को 24 घंटे के बाद इस्तेमाल न करें। यह आशा को बताना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि चमकी के दौरान इस्तेमाल में जरूरी बातें है। वहीं बुधवार को डीआइईसी भवन में बीएचएम, बीसीएम, भीबीडीएस, बीएम एंड ईए एवं प्रत्येक प्राथमिक तथा सामुदायिक केंद्र से एक एक हेल्थ एजुकेटर को प्रशिक्षण दिया जाएगा।  मौके पर जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार, यूनिसेफ के एसएमसी राजेश कुमार, डीआइओ डॉ एसके पांडेय सहित सभी बीसीएम उपस्थित ।