सीतामढ़ी :- विवाहपञ्चमी महोत्सव अन्तर्गत रविवार को धनुषयज्ञ विधि की रस्म पूरी,

सीतामढ़ी :- विवाहपञ्चमी महोत्सव अन्तर्गत रविवार को धनुषयज्ञ विधि की रस्म पूरी,

सागर कुमार चम्पारण टुडे, ब्यूरो प्रमुख सीतामढ़ी,,  

सीतामढ़ी :- परोसी देश नेपाल के जनकपुरधाम में चल रहे सप्ताहव्यापी विवाहपञ्चमी महोत्सव के दौरान रविवार को धनुषयज्ञ विधि की रस्म पूरी हो गई है। त्रेता युग में मिथिला के तत्कालीन राजा राजर्षि जनक द्वारा किए गए वादे की याद में हर साल शादी समारोह के हिस्से के रूप में धनुष यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र भगवान राम और लक्ष्मण ने गुरु विश्वामित्र के साथ धनुष यज्ञ में भाग लिया। उसके बाद ही वाल्मीकि रामायण में माता सीता के भगवान से विवाह का उल्लेख मिलता है।

मंदिर के महंत रामतपेश्वर दास वैष्णव ने बताया कि जानकी मंदिर के प्रांगण में धनुष यज्ञ किया गया। विवाह पंचमी के पहले दिन नगरदर्शन और दूसरे दिन फूलबाड़ी की लीला संपन्न हुई। तरह तरह के गीतों के साथ इस पूजा विधि को आगे बढ़ाया गया। इस दौरान मौके पर मौजूद महिला मंडल ने अपने मुख से ''ऐहन सुन्दर मिथिलाधाम, 

कहाँ पाएब दोसर ठाम,, गुनगुनाए

 घर-घर मेहमान आ चुके हैं। कुछ आ रहे हैं। विदेश में निमंत्रण भेजा गया है। माता सीता और भगवान राम के विवाह समारोह का उल्लेख मिलता है। रामायण अब जकीजको जानकी मंदिर में देखी जाती है। रामायण की पंक्तियाँ चारों दिशाओं में गूँजती हैं। खासकर जब रामलीला के माध्यम से रामसीता के विवाह के क्षण को प्रदर्शित किया जाता है तो मन रामायण काल ​​में पहुंच जाता है। जानकी मंदिर में भी ऐसा ही हाल है क्योंकि माता-पिता अपनी बेटी की शादी के लिए बेताब हैं। माता सीता को पुत्री माने जाने वाले जानकी मंदिर में माता-पिता महंत रामतपेश्वर दास वैष्णव पिछले एक महीने से तैयारी कर रहे हैं। नौलखा पैलेस में शादियों की कोई कमी न हो इसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। माता सीता को अपनी बहन मानने वाले उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास वैष्णव भी दिन-रात मेहनत करते रहे हैं।

त्रेता युग में मिथिला के राजा शिरध्वज जनक की पुत्री सीता और अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम के बीच वैवाहिक संबंध थे। आदर्श युगल रामसीता के विवाह की वर्षगांठ के अवसर पर हर वर्ष जनकपुर में मनसिर शुक्ल पंचमी की वर्षगांठ मनाई जाती है। बेशक रामायण को आधार के तौर पर लिया जाए तो यह रिश्ता पांच सौ साल से भी ज्यादा समय से चला आ रहा है। हालांकि, जनकपुर में हो रही तैयारियों से यह आभास होता है कि इस समय रामसीता की शादी हो रही है। आधिकारिक तौर पर शुक्रवार को शुरू हुआ यह महोत्सव 8 दिसंबर तक चलेगा।