आजादी के 73 शाल बाद भी सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली लालबकेया नदी पर सिर्फ पुल का पाया ही बना,नहीं बन सका पुल।

आजादी के 73 शाल बाद भी सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली लालबकेया नदी पर सिर्फ पुल का पाया ही बना,नहीं बन सका पुल।

सागर कुमार सीतामढ़ी,,
सीतामढ़ी :- 17 अगस्त वर्ष 09 का ओ डरावना दिन, जिसे याद कर आज भी जिले के बैरगनिया बाजार सहित पूर्वी चंपारण के फुलबरिया, गुरहंवा, ढाका एरिया क्षेत्र के लोगो की रूह कांप जाती है। जब लालबकेया नदी पार कर रहे नाव पलट गई थी। और इस दौरान तकरीबन चार दर्जन से ज्यादा लोग नाव पर सवार थे, जो देखते ही देखते काल के गाल में जा पहुंचे। जहां नदी के दोनो तरफ मौके पर मौजूद लोगो ने अपनी जान की परवाह न करते हुए डूब रहे लोगो में से मात्र बीस लोगो को बचा सके थे।वहीं तकरीबन दो दर्जन से ज्यदा लोग बाढ़ के पानी में कहीं लापता हो गए।


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रोने और चिल्लाने कि चीत्कार से वहां का वातावरण गमगीन हो गाय था। हर तरफ लोगो की आंखो से अश्रु बह रहे थे। ओ दिन एक मातम से कम नहीं थी। इस मामले मेे राज्य सरकार द्वारा आनन फानन ने अपनी राजनैतिक क्षति को भरपाई कराने को लेकर  प्रशासनिक कार्यवाही करते हुए उक्त घाट के पांच कथित ठीकेदारों पर मुकदमा भी चलाई गई। और उस मामले में उनकी गिरफ्तारी भी की गई। वैसे बाढ़ के हालात में प्रति वर्ष लोग नदी पार करने के दौरान काल के गाल में समाते रहते है।


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गिरफ्तार किए गए थे कथित ठिकेदार :-

ठेकेदार मो फिरोज खान, मो सजाउल्लाह दोनों पूर्वी चंपारण नाव चालक परीक्षण राम, नेक महम्मद, मो अब्दुल कादिर । 

 बताते चले कि बैरगनिया और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली सड़क रास्तों के बीचोबीच एक लालबकेया नमक नदी के निकलती है। जो नेपाल से निकलती है। फुलवरिया धाट के रास्ते अक्सर लोग बैरगनिया से पूर्वी चंपारण के बरेबा, कुष्महवा, ढाका इत्यादि जगहों के लिए प्रतिदिन आते जाते रहते है। चाहे बाढ़ का मौसम हो या सुखाड़ का लोग अक्सर इस रास्ते से नदी पार कर आते जाते है। जो बरसात और बाढ़ के समय ये रास्ता एक डरावना सा लोगो के मन में एहसास करता है।


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आजादी के 73 वाँ साल बीतने को है।आज तक इस नदी पर एक पुल नहीं बन सकी। हाला कि कभी पूर्व सांसद कोश से उक्त नदी के फुलवरिया घाट पर स्कृ पाईप वाली पुल तैयार किया गया था। जिसे चंद लोगो ने अपनी स्वार्थ में बाढ़ के दौरान पुल के नट सकृ को खोल दिया जो बाढ़ के चपेट मेे आने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। तब से वर्षा और बाढ़ के समय वहां के स्थानीय लोगों द्वारा आज भी अन्य राहगीरों से अवैध वसूली जारी है।


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जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की लापरवाही आज भी बैरगनिया और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली सड़क के बीचों बीच मौजूद लालबकेया नदी के दोनों तरफ देखने को मिलती है। किस तरह वहां स्थानीय लोग बाढ़ और बरसात के दौरान नदी पार करने वाले लोगो से अवैध वसूली करते है। बता दे की हर वर्ष वर्षा के कारण बाढ़ आ जाने से नदी से होकर निजी वाहनों की परिचालन बंद हो जाती था। रास्ता दल दल मिट्टी के चपेट में आ जाती है। इस दौरान सुबह से शाम सात बजे तक वहां स्थानीय लोगो द्वारा ट्रेक्टर से टोचन कर वैसे सैकड़ों वाहनों को मनमाने पैसा लेकर आर पार कराया जाता है। जो दल दल मिट्टी के कारण नदी पार नहीं कर पाते है।इस दौरान शादी विवाह की लगन भी जबरदस्त होती है, कितने बराती की गाड़ी लड़का सहित नदी के किनारे रात बितानी पड़ी। कितने लड़के व लकियो की शादी दूसरे दिन बीना लगन की सहनई बजती है। लड़की के परिवार वालों को आर्थिक क्षति की नुकसान उठानी पड़ती है।जिसका अंदाजा नहीं लगा सकते।


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बता दे कि सांसद रमा देवी और पूर्व विधायक पवन जायसवाल के द्वारा वर्ष 2016 मेे लालबकेया नदी के फुलवरिया घाट पर पुल को लेकर सिलाणस किया गया था।तब ऐसा लगने लगा कि बैरगनिया से पूर्वी चंपारण हो या पश्चिम चम्पारण कि दूरी अब नहीं ज्यादा है। शिलान्यास के तुरंत बाद भी लालबकेया नदी के फुलवरिया घाट पर फूल को लेकर उसके पाया का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गई। लेकिन तब से अब तक राज्य सरकार के पेंच में उलझ कर रह गई फुलवरिया नदी पर निर्माण होने वाली पुल। उक्त पुल के निर्माण को लेकर एक, दो नहीं तीन ठिकेदार काम कर चुके है। तीनो ठिकेदार मिलकर उक्त पुल का सिर्फ पाया ही बना सका। उसपे छत नहीं जानकर सूत्रों की माने तो ठिकेदारो को उक्त पुल निर्माण को लेकर समय पर पैसा नहीं मिलने के कारण नदी पर पुल निर्माण बंद है।

 वर्ष 2016 से 017 के लास्ट तक उक्त नदी पर सीमेंटेड पीसीसी पुल को लेकर तीन ठीकेदारों ने सिर्फ पाया का निर्माण किया। 

तीन साल बीतने को है। आज भी वहां के स्थानीय लोग इस उम्मीद में है कि राज्य सरकार मेे ऐसा को मुख्यमंत्री होगा जो श्री कृष्ण बन कर आयेगा। और लालबकेया नदी पर अधूरी पड़े पुल के साथ उसके पहुंच पथ का भी निर्माण कतावेगा।