घोड़ासहन : बाजार के मुख्य मार्ग पर अतिक्रमणकारियों का कब्ज़ा

स्थानीय बाजार भारत-नेपाल सीमावर्ती महत्वपूर्ण बाजारों में गिना जाता है। इसी बाजार में प्रखंड कार्यालय, थाना, कस्टम, दुरसंचार, पोस्टऑफिस, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बैंक, विद्युत्, स्कूल, बीआरसी सहित दर्जनों की संख्या में सरकारी-गैरसरकारी कार्यालय अवस्थित है। प्रखंड के 14 पंचायतो का मुख्य बाजार भी यहीं है। इस बाजार में प्रत्येक दिन हजारों कि संख्या में विभिन्न कार्यालयों के कामो से लोगों आना जाना लगा रहता है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्र के प्रमुख बाजार होने के कारण नेपाल से भी काफी संख्या में नेपाली नागरिकों का इस बाजार में व्यवसायिक कार्यो से आना जाना लगा रहता है। बढ़ती जनसंख्या......................

घोड़ासहन : बाजार के मुख्य मार्ग पर अतिक्रमणकारियों का कब्ज़ा

घोड़ासहन : बाजार के मुख्य मार्ग पर अतिक्रमणकारियों का कब्ज़ा

घोड़ासहन, पूर्वी चम्पारण।

स्थानीय बाजार भारत-नेपाल सीमावर्ती महत्वपूर्ण बाजारों में गिना जाता है। इसी बाजार में प्रखंड कार्यालय, थाना, कस्टम, दुरसंचार, पोस्टऑफिस, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बैंक, विद्युत्, स्कूल, बीआरसी सहित दर्जनों की संख्या में सरकारी-गैरसरकारी कार्यालय अवस्थित है। प्रखंड के 14 पंचायतो का मुख्य बाजार भी यहीं है। इस बाजार में प्रत्येक दिन हजारों कि संख्या में विभिन्न कार्यालयों के कामो से लोगों आना जाना लगा रहता है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्र के प्रमुख बाजार होने के कारण नेपाल से भी काफी संख्या में नेपाली नागरिकों का इस बाजार में व्यवसायिक कार्यो से आना जाना लगा रहता है। बढ़ती जनसंख्या के आगे घोड़ासहन बाजार की सड़के बौनी पड़ने लगी है। दुसरी तरफ बाजार में व्यवसायिक प्रतिष्ठान के द्वारा अपने -अपने दुकानों के आगे की सड़क को अतिक्रमण कर दुकान सजाकर कारोबार करने का काम किया जाता है। जिसके कारण ग्राहकों का साइकिल, मोटरसाइकिल, चार चक्का वाहन सडको पर ही लगा रहता है। जिसके कारण सड़कों की चौड़ाई दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। अतिक्रमण का आलम यह है कि  कुछ व्यवसाई अपने अपने दुकान के आगे सड़क के किनारों को अतिक्रमण कर पक्का निर्माण भी वेखौफ कर लिया है। जिसके कारण सड़कों पर जाम की समस्या हमेशा बनी रहती है।


 जिसके कारण सड़क पर चलना भी मुश्किल हो जाता है। सड़कों पर घंटों घंटों जाम की समस्या आम बन गई है।  घोड़ासहन बाजार के चौधरी मार्केट से लेकर भगतसिंह चौक मुख्य मार्गों में गिना जाता है। जिसकी चौड़ाई भी काफी है। जो दस्तावेज की शोभा बढ़ा रही है। हलाकि स्थानीय प्रशासन के लोगों का इन्हीं रास्तों से आना जाना होता है। लेकिन अतिक्रमण पर इनकी नजर नहीं पड़ती है। प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण अतिक्रमणकारियों का हौसला इस बाजार में काफी बुलंद हैं। यदा कदा जाम में फंसे लोगों के द्वारा दुकान थोड़ा पिछे करने को कहा जाता है तो अतिक्रमणकारियों के द्वारा राहगीरों से मार पीट भी कर ली जाती है। यह समस्या आये  दिन बाजार में बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती अतिक्रमण के खिलाफ हर जगह अघिकारी मुहिम चला कर सड़क को अतिक्रमण से मुक्त कराने में लगी हुई है। परन्तु घोड़ासहन की स्थानीय प्रशासन बढ़ती अतिक्रमण की समस्या को देखकर भी मौन है। वहीँ भगत सिंह चौक से वीरता चौक व बाजार रोड की भी कमो बेस यहीं स्थिति है।