घोड़ासहन के सरकारी डॉक्टर के निजी अस्पताल सुनयना स्वास्थ्य केंद्र में 7 महीने की प्रसूता की ईलाज में लापरवाही के कारण गई जान, परिजनों ने काटा बवाल, डॉक्टर फरार

घोड़ासहन के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के एम गुप्ता के एक निजी अस्पताल में ईलाज कराने आई एक महिला की जान चली गई। चिकित्सक क्लिनिक छोड़कर फरार बताया जा रहा है। वही मौके पर परिजनों ने जमकर बवाल काटा। परिजन ईलाज के लिए चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। महिला की पहचान कोटवा निवासी आलोक सिंह .......

घोड़ासहन के सरकारी डॉक्टर के निजी अस्पताल सुनयना स्वास्थ्य केंद्र में 7 महीने की प्रसूता की ईलाज में लापरवाही के कारण गई जान, परिजनों ने काटा बवाल, डॉक्टर फरार

घोड़ासहन के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के एम गुप्ता के एक निजी अस्पताल में ईलाज कराने आई एक महिला की जान चली गई। चिकित्सक क्लिनिक छोड़कर फरार बताया जा रहा है। वही मौके पर परिजनों ने जमकर बवाल काटा। परिजन ईलाज के लिए चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। महिला की पहचान कोटवा निवासी आलोक सिंह की करीब 24 वर्षीय पत्नी रीमा देवी के रूप में बताया जा रहा है। घोड़ासहन थाना क्षेत्र के भेलवा निवासी परिजन ने बताया कि रीमा की शादी कोटवा में हुई थी। इनके गार्जियन दिल्ली में रहते है। दिल्ली से मृतका रीमा अपने मायके भेलवा आई थी। जहाँ से ईलाज के लिए सोमवार घोड़ासहन के मिशन हाउस के पास अवस्थित सुनयना स्वास्थ्य केंद्र नामक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहाँ ईलाज में सुधार नहीं होने पर रेफर करने के लिए कहा गया। जाने के लिए गाड़ी भी मंगवा लिया। लेकिन जबरन घेर कर रखा गया। जहाँ गुरुवार की देर रात्रि उसकी जान चली गई।

ज्ञात हो कि यह स्वास्थ्य केंद्र एक परिवार मिलकर चलाते हैं। जिसका सञ्चालन अभी घोड़ासहन के डॉक्टर एस पी गुप्ता के पुत्र डॉक्टर मोहन कुमार के द्वारा किए जाने की बात बताई जा रही है। जिसमे खुद डॉक्टर एस पी गुप्ता के साथ ही इनके पुत्र डॉक्टर के एम गुप्ता, डॉक्टर मोहन कुमार, डॉक्टर संजीव कुमार सहित कुछ अन्य डॉक्टर भी मरीजों का ईलाज करते हैं। जैसा कि स्वास्थ्य केंद्र के पास बोर्ड पर भी लगा है। जिसमे से के एम् गुप्ता यहाँ स्थानीय सरकारी अस्पताल में पोस्टेड भी हैं। 

विदित हो कि इस एरिया में कई निजी क्लिनिक है। कई अवैध क्लिनिक तो कई झोला छाप डॉक्टरों का क्लिनिक भी इस क्षेत्र में खुलता व बंद भी होता रहता है। जिसके कारण यह स्थान मरीजों के मरने का हब बनता जा रहा है। इसके पहले भी कई मरीज डॉक्टर की लापरवाही व झोला छाप डॉक्टरों के झोला छाप ईलाज के कारण अपना जान गवां चुके है। हलाकि जान जाने के बाद प्रशासनिक क्षत्र-छाया में मोल जोल कर रफा दफा भी हो जाता है। इसके पहले भी कई मामलो में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई तो कई मामलो में कई दिन बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। जिसमे कई डॉक्टर अभी भी जेल की हवा खा रहें हैं।

हलाकि इस मामले में भी कई तरह के बात सामने आ रहें हैं। कोई बता रहा है कि प्रसव पीड़ा होने पर रीमा को सोमवार को भर्ती कराया गया था। जहाँ बुधवार को मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। जिसके बाद रीमा का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा था। तो कई लोगो ने बताया कि रीमा को पूर्व में ऑपरेशन से दो बेटियां है और अब बेटी नहीं चाहिए था। जिसको लेकर 7 महीने की प्रसूता को उक्त स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। जहाँ उसकी जान चली गयी। जिसके बाद परिजनों ने क्लिनिक पर हंगामा व तोड़फोड़ भी किया। हलाकि सुचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष इन्स्पेक्टर अनुज कुमार पांडेय ने आक्रोशित लोगो को समझा बुझाकर शांत कराया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टपार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर अग्रतर कार्यवाई की जाएगी।

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