जीएमसीएच के कथित चर्चित दलाली का अपडेट न्यूज के कुंदन पांडेय ने किया खुलासा

उत्तर बिहार का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल जीएमसीएच ना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बल्कि दलाली के लिए भी हमेशा सुर्खियों में रहता है। प्रशासनिक लाख दावें हों पर मरीजों के बीच दलालों .......

जीएमसीएच के कथित चर्चित दलाली का अपडेट न्यूज के कुंदन पांडेय ने किया खुलासा

जीएमसीएच के कथित चर्चित दलाली का अपडेट न्यूज के कुंदन पांडेय ने किया खुलासा

टीओपी के फर्दब्यान से लेकर स्वास्थ सुविधाओं में कैसे कथित दलाल लेता है दलाली, किसकी इजाजत से टीओपी के पास लगाता है अपनी कुर्सी

उत्तर बिहार का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल जीएमसीएच ना सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बल्कि दलाली के लिए भी हमेशा सुर्खियों में रहता है। प्रशासनिक लाख दावें हों पर मरीजों के बीच दलालों को पहचानने की कोई भी स्कैनर नहीं रहता है अधिकारियों को, शायद अपने ही दलालों को बचाने का प्रयास करते हैं इसलिए नहीं खोज पाते हैं कथित दलाल।

आज जब एक पीड़ित से टीओपी में फर्दब्यान के लिए 2000 रूपया और पूर्जा कटवाने का 200 रूपया कथित दलाल दिनेश कुमार द्वारा लिया गया, तब इसकी सूचना पर अपडेट न्यूज के कुंदन पांडेय पहुंच कर विडियो के सामने ही कथित दलाल की दलाली का पोल खोल दिया। जिसमें वो स्वीकार करता है कि उसने उक्त दोनों राशि लिया है। हालांकि उसकी नियुक्ति के संबंध में पूछे जाने पर वो बात काटने और बात खत्म करने का जोर देता है। वहीं जब उसकी पोल खुलती है तो वह पैसा वापस करने को बोलता है और जीएमसीएच टीओपी में फर्दब्यान के समय लाइन से हटवा देता है क्योंकि लाइन में रहने पर कथित दलाल को टीओपी प्रभारी को देना पड़ेगा हिसाब। यानि फर्दब्यान लाला लाइन में मिला है दलाली और बिना लाइन वाला में पैरवी या कोई अन्य कारण से नहीं मिला है दलाली तो उस हिसाब से किया जाएगा फर्दब्यान।

मान भी लें कि जीएमसीएच टीओपी का वह कथित दलाल नहीं है तो फिर मरीजों और पीड़ित तक पुलिस से पहले पहुंचने वाले पर अब तक टीओपी ने क्यों नहीं की कार्यवाही? क्यों और कैसे वो टीओपी के समीप अपना कुर्सी लगाकर पीड़ितों से करता रहता है अवैध उगाही? हालांकि इन सब के बीच जिला में गणमान्यों के बीच चर्चा होने लगी है कि यदि कोई राशि फर्दब्यान के लिए सरकारी तय है तो क्यों नहीं बेतिया पुलिस उसको सार्वजनिक कर देती है ताकि किसी भी आम अवाह्म को तकलीफ ना हो? साथ ही टीओपी और पीड़ित के बीच के यह कथित दलाल भी स्वतः खत्म हो जाए। कुल मिलाकर पूरा मामला वरीय पदाधिकारियों के जांच का विषय है और टीओपी के प्रभारी अवर निरीक्षक सुधांशु शेखर की गतिविधियाँ संदिग्ध और संदेहास्पद है, जिनके कार्यकाल में दलाल और दलाली पूर्व के समान फल फूल रहे हैं।