नेपाल की राजनीतिक कलह का असर नहीं होगा भारत - नेपाल के बीच नए रेलखंड करार पर: उत्कर्ष

नेपाल की राजनीतिक कलह का असर नहीं होगा भारत - नेपाल के बीच नए रेलखंड करार पर: उत्कर्ष
  • 150 किलो मीटर की दूरी सिमट कर होगी 136 किलो मीटर
  • 13 महत्वपूर्ण स्टेशन तैयार किए जाएंगे
  • 32 रेलवे ओवरब्रिज, 53 अंडर पास होंगे तैयार
  • 41 नए पुल तो 259 छोटे पुलिया भी होगी तैयार।

सीतामढ़ी ;- नहीं होगी करार रद्द, होगी भारत नेपाल के बीच रेल खंड का निर्माण। जानकारी को ताज़ा करते हुए रक्सौल - काठमांडू ( नेपाल ) के बीच रेल खंड के निर्माण को देख रहे डिप्टी चीफ इंजीनियर ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उक्त रेल खंड के निर्माण पर कोई खतरा नहीं है। सर्वे को लेकर काम आगे बढ़ाया गया है। जिसका टेंडर हो चुका है। उक्त रेल खंड के सर्वे कराने की काम का जिम्मा साउथ कि एक पब्लिक सेक्टर कम्पनी कोंकण रेलवे को दिया गया है। इस काम को पूरा करने में तकरीबन एक साल की समय अवधि लगेगी।


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अब ट्रेन द्वारा पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू जाना लोगों को होगा आसान। उक्त बातें एक बातचीत के दौरान पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने कहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में रक्सौल से साढ़े पांच किलोमीटर रेल लिंक द्वारा भारतीय रेल लिंक से जोड़ते हुए पड़ोसी देश नेपाल के बीरगंज में इनलैंड कंटेनर डिपो स्थापित किया गया था। जो वर्तमान में सुचारू रूप से कार्यरत है। उन्होंने बताया कि नेपाल में अवसंरचना तथा आर्थिक विकास की आवश्यकता को महसूस करते हुए भारत और पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा रक्सौल (भारत) और काठमांडू (नेपाल) के बीच रेल मार्ग जोड़ने कि एक सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया। ताकि आम लोगों को सिमापार यात्रा को लेकर रेल मुहैया कराया जा सके। जो राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर भारत - नेपाल के रास्ते और मजबूत कर सके। साथ ही माल परिवहन भी सुचारू रूप से किया का सके। रेलवे की इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए भारत और नेपाल प्रधान मंत्री की उपस्थिति में 31 अगस्त 2018 को इससे संबंधित समझौता पर हस्ताक्षर किया गाय। इसके साथ ही भारतीय क्षेत्र रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू के बीच सीधा रेल लाइन से जोड़ने का रास्ता साफ हो गया था। उन्होंने बताया कि यह बहुत ही बृहद रेल परियोजना है।जिससे नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक आर्थिक और राजनीतिक संबंध प्रगाढ़ होंगे। दोनों देशों के बीच इस रेलखंड के निर्माण को लेकर काफी उत्साह है। रक्सौल से काठमांडू के बीच की दूरी लगभग 145 से 150 किलोमीटर की है। इन दोनों देशों के बीच रेल लाइन तैयार होने से इनके बीच की दूरी सिमटकर मात्र 136 किलोमीटर हो जावेगा।  जो नेपाल के आरक्षित वन, संरक्षण क्षेत्र और राष्ट्रीय उद्यानों को बचाया जा सके।


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रक्सौल-काठमांडू के बीच रेलवे लाइन बिछाने का सर्वेक्षण खत्म, अब रेल का इंतजार

रक्सौल-काठमांडू के बीच रेलवे लाइन बनाने का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। बताते चलें कि जून 2020 तक इसका डीपीआर तैयार कर लिया जाएगा। रक्सौल-काठमांडू के बीच करीब 136 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनेगी। जिसमें 13 महत्वपूर्ण स्टेशन बनाए जाएंगे। इस रेलखंड से परिचालित होने वाली ट्रेनें सुरंगों से होकर चलेगी। जो कि सुरंग पहाड़ खोदकर बनाया जाएगा।

दोनों देशों के बीच साल 2018 में ही समझौता

रेलवे लाइन बनाने को लेकर दोनों देशों के बीच साल 2018 में ही समझौता हो चुका है। जहां रेलवे लाइन के निर्माण पर लगभग 16,5,50 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना जताई जा रही है। 136 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर 32 रेलवे ओवरब्रिज बनाया जाएगा। वहीं सड़क पर यातायात को सुचारू ढंग से चलाने के लिए रेलखंड पर 53 अंडरपास बनेगा।


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बता दें कि रेलवे का यह मेगा प्रोजेक्ट है। इससे नेपाल-भारत के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे। ट्रेनें ऊपर चलेगी तो वहीं नीचे से गाडियां। इस रेलखंड पर 41 बड़े पुल, तथा 259 छोटा पुल बनेगा। 


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रेलवे स्टेशन तैयार होंगे यहां :-

उन जगहों का नाम इस प्रकार है।सर्वेक्षण के अनुसार रक्सौल, बीरगंज, बगही, पिपरा, धुमडवना, ककाडी, निजगढ़, चंद्रपुर, धिवाला, शिखरपुर सिनेरी, साथिखेल और काठमांडू जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए रक्सौल से काठमांडू तक के बीच यह रेलखंड 136 किलोमीटर लंबी होगी। इस परियोजना को इस तरह से प्रस्तावित किया गया है।


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क्या कहते है डिप्टी चीफ इंजीनियर :-

भारत नेपाल के बीच तैयार होने वाली न्यू रेल खंड रक्सौल - काठमांडू को लेकर पूछे जाने पर उक्त रेल खंड को देख रहे डिप्टी चीफ इंजीनियर ने बताया कि उक्त रेल खंड का पहला शार्वे का काम पूरा हो चुका है।जिसे 28 दिसंबर 019 को रेलवे बोर्ड को समिट कर दिया गया है। जिसका फाइनल शर्वे करने की चिट्ठी आने के बाद साउथ कि कोंकण रेलवे को उक्त काम का जिम्मा दिया गया है। जो उक्त रेलखंड का शर्वे का फाइनल काम करेगी। और उस पर आने वाली खर्च यानी कौसट रिपोर्ट निकाल कर देगी। जिसको रेलवे बोर्ड भेजा जाएगा। वहां से शेंशन होगा। और उसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू किया जाएगा। एक सवाल पर उन्होंने बताया कि पहला शर्वे इसका प्रीमियम इंजीनियरिंग शर्वे कहा जाता है ओ कोमिका रेलवे द्वारा किया जा चुका है। जिसका रिपोर्ट रेलवे बोर्ड से शेंशान हो गया है। इसी के आधार पर इसका फाइनल  डिटेल शर्वे होगा, जिसमे सारा वर्क डिटेल रहेगा। जिसमे बताया जाएगा कि स्टेशनों कि संख्या, पुल और पुलिया, अंडरपास ब्रिज, वहीं होगी या बढ़ाया जाएगा। और कहां कहां रेल यार्ड बनाया जाएगा इत्यादि।

उत्तकर्श कुमार , डिप्टी चीफ इंजीनियर, पूमरे/