सीतामढी :- जेसीबी लगाकर रेलवे परिक्षेत्र को कराया गया खाली

सीतामढी :- सीतामढी रेलवे स्टेशन को वाल्डक्लास रूप देने की मुहिम तेज कर दिया गाया है। स्थानीय संबंधित विभाग के अधिकारी विनय कुमार के नेतृत्व में रेलवे सुरक्षा बल कमांडर ओम प्रकाश ठाकुर तथा राजकीय रेल थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह, के साथ सुरक्षा बलो के द्वारा सीतामढ़ी रेलवे परिक्षेत्र को खाली करने की मुहिम चलाई गई। इस दौरान रेलवे स्टेशन प्रशासन द्वारा जेसीबी और ट्रेक्टर के माध्यम से पूर्व के निर्माणाधीन........

सीतामढी :- जेसीबी लगाकर रेलवे परिक्षेत्र को कराया गया खाली

सागर कुमार, चम्पारण टुडे, (सीतामढ़ी ब्यूरो)

सीतामढी :- सीतामढी रेलवे स्टेशन को वाल्डक्लास रूप देने की मुहिम तेज कर दिया गाया है। स्थानीय संबंधित विभाग के अधिकारी विनय कुमार के नेतृत्व में रेलवे सुरक्षा बल कमांडर ओम प्रकाश ठाकुर तथा राजकीय रेल थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह, के साथ सुरक्षा बलो के द्वारा सीतामढ़ी रेलवे परिक्षेत्र को खाली करने की मुहिम चलाई गई। इस दौरान रेलवे स्टेशन प्रशासन द्वारा जेसीबी और ट्रेक्टर के माध्यम से पूर्व के निर्माणाधीन पुरानी दुकानों को तोड़ने और मलवा को हटाने तथा साफ सफाई का काम किया गया। किसी तरह की कोई हो हल्ला तथा बाताबाती अपने दुकान गामा चुके दुकानदारों द्वारा नही किया गया। दुकानदार इस दौरान रेलवे एरिया को साफ सफाई कर रहे कर्मियों को साथ दे रहे थे। लेकिन अपनी दुकान गामा चुके छोटे छोटे दुकानदारों के चेहरे पर उनकी दुःख साफ दिखाई देता था, की ये लोग अपनी परिवार को रोटी का इंतजाम कहां से करे।

रेलवे परिसर से दुकानें हटा दिए जाने से चारों तरफ सन्नाटा छा गया है। पहले की तरह न तो अब चहल पहल नजर आ रही है और ना ही किसी स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान है। दुकानदार के साथ ही विभिन्न प्रकार के दुकानों काम करने वाले कारीगर व मजदूरों के चेहरे पर उदासी छाई है। कुछ लोग इधर उधर बेरोजगारी में घूमते नजर आते हैं तो कुछ लोग उजड़े हुए दुकानों के सामने बैठकर समय काटते नजर आते हैं। जबकि स्टेशन परिसर में सदैव ही दुकानदार व कर्मियों की हंसी ठिठोली से माहौल खुशनुमा बना रहता था।

दुकानदार मोहन प्रसाद ने बताया कि दुकान हटाए जाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। जीवन रोटी की समस्या सामने है। वे 50 वर्षों से अपने व परिवार की परवरिश कर रहे थे। रेलवे से शेष खाली जमीन में शिफ्ट करके उन्हें सहयोग करने की अपील की, आश्वासन भी मिला। लेकिन अभी तक इस पर कोई पहल नहीं हो सकी है। रेलवे को हमें बसाने पर विचार करने की जरूरत है। रोजी रोटी व बच्चों के भरण पोषण का सवाल सभी के सामने है। 

दुकानदार सन्नी कुमार ने बताया कि वे चिंतित है। कुछ पहले ही दुकान में पूंजी लगाकर सजाया था। सब खत्म हो भी गया, हम कर्ज में डूब गए हैं।