सीतामढ़ी :- बच्चों ने पहली बार खाया अन्न, चखा खीर का स्वाद

सीतामढ़ी :- बच्चों ने पहली बार खाया अन्न, चखा खीर का स्वाद

-- रीगा के बुलकीपुर पंचायत स्थित मुशहर टोला केंद्र संख्या 194 पर विशेष अन्नप्रासन का आयोजन

सागर कुमार चम्पारण टुडे सीतामढ़ी (ब्यूरो)

सीतामढ़ी :- पोषण माह के उपलक्ष्य पर रीगा के बुलाकीपुर पंचायत स्थित मुशहर टोला केंद्र संख्या 194 पर विशेष अन्नप्रासन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ कविप्रिया ने छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को खीर खिला कर उनका अन्नप्रासन कराया। अन्नप्रासन के साथ ही उन्होंने बच्चों के संपूर्ण देखभाल सम्बन्धी जानकारी क्षेत्र की महिलाओं को दी। साथ ही महिलाओं को बच्चे के पोषण के लिए जरूरी आहार के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि घर में सूजी, गेहूं का आटा, चावल, रागा और बाजरा में पानी या दूध मिलाकर दलिया बना कर बच्चों को खिला सकते हैं। आहार में चीनी या गुड़ भी दिया जा सकता है।

गर्भवतियों को बेहतर पोषण की मिली जानकारी :-

पिरामल के जिला प्रोग्राम लीड दिव्यांक श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण और प्रसवपूर्व जांच की जानकारी दी गई। बताया गया कि गर्भावस्था में खान-पान का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। प्रतिदिन हरी साग-सब्जी, मूंग का दाल, सतरंगी फल, सूखे मेवे एवं दूध, सप्ताह में दो से तीन बार अंडे, मांस, मछली खाएं। साथ ही जिन महिलाओं में खून की कमी हो, उन गर्भवती महिलाओं को बच्चे को जन्म देने से पहले 180 आयरन की गोलियां लेनी चाहिए और 180 ही जन्म के बाद।

टीकाकरण और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान पर चर्चा :-

अन्नप्रासन के अवसर पर बच्चों के टीकाकरण की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि टीकाकरण बच्चों को गंभीर व घातक बीमारियों के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए दी जाती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि लोग अपने बच्चों को सभी प्रकार के टीके ससमय जरूर लगवाएं। इसके बाद प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के बारे में बताया गया। जिसके तहत प्रत्येक महीने की नौ तारीख को सभी गर्भवतियों की स्त्री रोग विशेषज्ञ जांच करके उचित इलाज करते हैं। जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान करके इलाज किया जाता है। समय पर इन खतरों की पहचान करके बहुत सी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। सुरक्षित प्रसव कराने को लेकर गर्भवती महिलाओं का इलाज किया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक माह केंद्रों पर बच्चों का वजन एव लंबाई निश्चित रूप से कराये।