स्थानीय रेलवे स्टेशन का विचरण क्षेत्र ब्रोकरों गिरफ्त में, बेचे जाते है इंच इंच जमीन, प्रसाद खाते है संबंधित विभाग

स्थानीय रेलवे स्टेशन का विचरण क्षेत्र ब्रोकरों गिरफ्त में, बेचे जाते है इंच इंच जमीन,  प्रसाद खाते है संबंधित विभाग

सागर कुमार सीतामढ़ी,,


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सीतामढ़ी :-  बिकता है स्टेशन खरीददार चाहिए। जिसे जो कारोबार करने हो, आे व्यक्ति स्टेशन परिसर के बतौर ठिकेदार से बात कर अपने काम को कर सकते है।इसी तरह की एक कारोबार प्राइवेट ट्रांस्पोट का बीते कई दिनों से बेरोक टोक स्थानीय रेलवे स्टेशन के विचरण क्षेत्र से शुरू है। जो ट्रक भर - भर कर बाहर से सामान लाकर स्थानीय बाजार के व्यवसायियों को स्टेशन परिसर से पहुंचाने का अपना अड्डा बना रखा है। यह सिलसिला बीते कई दिनों से बदस्तूर जारी है। जिसे कैमरे में कैद कर मामले को लेकर पूछे जाने पर स्थानीय स्टेशन अधीक्षक मदन प्रसाद ने इस तरह अनभिक्ता जताते हुए बताया कि मुझे पता नहीं है। अभी देखते है, जबकि सूत्रों पर भरोसा करे तो स्टेशन परिसर से बीते कई दिनों से अवैध ट्रांस्पोर्ट की गोरख धंधा फल फूल रही है। कारोबारी को स्थानीय सभी रेल अधिकारियों का आशीर्वाद बतौर प्रसाद प्राप्त है। 


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क्या कहते है सूत्र :- 


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सूत्रों की भरोसा करे तो स्थानीय रेलवे स्टेशन से प्लेटफार्म तक बिकती है,  खरीददार चाहिए। सूत्र बताते है कि विचरण क्षेत्र में लगने वाली रेलवे की मान्यता प्राप्त दुकानों की लंबाई - चौरण में भी अतिक्रमण है। रेलवे विचरण क्षेत्र की जमीन मीणा बाजार, जीप का सवारी स्टैंड, तथा जुआ और सटे बाजी के लिए बेचे जाते है। खरीददार चाहिए। सूत्र बताते है कि रेलवे स्टेशन के विचरण क्षेत्र की खरीद और बिक्री सौ सैकड़ा में नहीं बल्कि हजारों और लाख रुपए की लेनदेन से होती है।


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क्या कहते है राजकीय रेल पुलिस :- 

रेलवे स्टेशन विचरण क्षेत्र में हप्तो से चल रही ट्रांसपोर्ट के साथ अन्य अवैध बाजार को लेकर पूछे जाने पर रेल थाना प्रभारी ने बताया कि हमारे पास सिर्फ लौ एंड ऑडर यानी स्टेशन की विधि व्यवस्था का चार्ज है। स्टेशन के किस एरिया में क्या धंधा चल रही है ओ सभी काम आरपीएफ के चार्ज के है। वैसे रेलवे स्टेशन के विचरण क्षेत्र से अवैध ट्रांसपोर्ट की बात बीते दिन सामने आया था। जो बिना कार्यवाही किए बंद करा दिया गया था। 

 

 

क्या कहते है रेलवे सुरक्षा बल :-

मामले को लेकर पूछे जाने पर आरपीएफ कमांडर अनीता कुमारी ने इस नए गोरख धंधा पर अंभिक्ता जताई। जिन्होंने बताया कि ऐसा मामला तो अब तक सामने नहीं आया है। फिर भी पता करके देखती हूं।

 

 

इस तरह की जानकारी को लेकर पूछे जाने पर संबंधित स्थानीय रेलवे प्रशासन खुद को अलग कर लेते है। या दूसरे संबंधित विभाग के सर पर पटक कर अपनी पल्ला झर लेते है। सूत्रों पर भरोसा करे तो स्टेशन का विचरण क्षेत्र सट्टे बाजी से लेकर मीणा बाजार लगने तक बेची जाती है। जिसमे रेलवे के स्थानीय अधिकारियों को भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इन लोगो के आशीर्वाद के बदौलत ही अवैध धंधा फल फूल रही है। सूत्र कहते है ठिकेदार रेल प्रशासन की स्थानीय अधिकारियों से एक रकम तय कर उसे  मंथली के हिसाब से बुक कर लेते है। उसी तरह वसूली कर खुद खाते है और अधिकारियों को भी परोसते है। यह है स्थानीय स्टेशन की एक कड़वी सच्चाई।