झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन - एक युग का अंत

रांची/नई दिल्ली। झारखंड की राजनीति के एक स्तंभ, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे श्री शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। राजधानी रांची के रिम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कई महीनों से उम्र ........

Aug 4, 2025 - 11:08
Aug 4, 2025 - 11:28
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन - एक युग का अंत
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रांची/नई दिल्ली। झारखंड की राजनीति के एक स्तंभ, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे श्री शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। राजधानी रांची के रिम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कई महीनों से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।

राजनीतिक जीवन का एक लंबा सफर :
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड (तत्कालीन बिहार) के दुमका जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनका जीवन संघर्ष और आंदोलन की मिसाल रहा। वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक नेताओं में गिने जाते हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ज़मीनी आंदोलनों से की थी। आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के हक के लिए वे दशकों तक संघर्ष करते रहे। केंद्र सरकार में मंत्री और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके शिबू सोरेन को लोग प्यार से "गुरुजी" कहते थे।

निधन पर शोक की लहर :
शिबू सोरेन के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (उनके पुत्र), बिहार के मुख्यमंत्री, तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री ने शोक संदेश में कहा, “शिबू सोरेन का जीवन गरीबों और आदिवासियों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।”

अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ :
सरकार ने घोषणा की है कि शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव नेमरा में किया जाएगा। हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं। उनके सम्मान में झारखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

एक प्रेरणास्रोत और विरासत :
शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे। उन्होंने आदिवासी समाज को अपनी पहचान और आवाज दी। उनकी राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा आगे बढ़ा रहे हैं।

उनका निधन केवल झारखंड ही नहीं, पूरे भारत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

"गुरुजी" की जीवन गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, सेवा और सामाजिक न्याय की मिसाल बनी रहेगी। चम्पारण टुडे न्यूज़ परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।

🙏 ओम् शांति 🙏

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