निशांत कुमार की ‘सद्भाव यात्रा’ आज से शुरू, पूर्वी चंपारण से करेंगे राजनीतिक आगाज़

चम्पारण टुडे डेस्क /बिहार।  पटना/पूर्वी चम्पारण। बिहार की सियासत में एक नई हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आज से अपनी पहली राजनीतिक यात्रा ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस यात्रा का आगाज़ ऐतिहासिक भूमि पूर्वी चंपारण से होगा, जहां वह दोपहर करीब 3 बजे पहुंचेंगे।

May 03, 2026 - 14:56
Updated: 3 hours ago
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निशांत कुमार की ‘सद्भाव यात्रा’ आज से शुरू, पूर्वी चंपारण से करेंगे राजनीतिक आगाज़
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चम्पारण टुडे डेस्क /बिहार। 
पटना/पूर्वी चम्पारण। बिहार की सियासत में एक नई हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आज से अपनी पहली राजनीतिक यात्रा ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस यात्रा का आगाज़ ऐतिहासिक भूमि पूर्वी चंपारण से होगा, जहां वह दोपहर करीब 3 बजे पहुंचेंगे।

जेडीयू कार्यकर्ताओं में इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। चैलाहा के पास कार्यकर्ता उनका भव्य स्वागत करेंगे। निशांत कुमार ने अपने इस कदम को परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि चंपारण सत्याग्रह की तरह ही यह भूमि सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की प्रतीक रही है। उनके पिता नीतीश कुमार ने भी कई बार यहीं से जनसंपर्क अभियानों की शुरुआत की थी।

पहले चरण में चम्पारण, फिर वैशाली

निशांत कुमार की यह ‘सद्भाव यात्रा’ 3 मई से शुरू होकर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी।

पहला चरण: 3 और 4 मई को चंपारण में जनसंपर्क
दूसरा चरण: 7 मई को वैशाली में कार्यक्रम

इस यात्रा के जरिए निशांत कुमार सीधे जनता से जुड़ने की कोशिश करेंगे, ठीक उसी तरह जैसे उनके पिता ने अपने राजनीतिक करियर में किया।

पहले दिन का पूरा कार्यक्रम

3 मई को यात्रा के पहले दिन निशांत कुमार का व्यस्त कार्यक्रम तय किया गया है—

सुबह 11:15 बजे पटना के 7 सर्कुलर रोड से प्रस्थान
11:30 बजे सारण के बजरंग चौक ओवरब्रिज पर स्वागत
12:15 बजे वैशाली जेडीयू जिला कार्यालय
1:15 बजे मुजफ्फरपुर के सकरी चौक
2:45 बजे पूर्वी चंपारण के महेंद्र चौक, मंगराही
3:15 बजे चनपटिया के चुहड़ी शुगर फैक्ट्री गेट
3:45 बजे जोगापट्टी
4:00 बजे बेतिया के हरिवाटिका चौक पर गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण
रात 8:15 बजे वाल्मीकिनगर में विश्राम


राजनीतिक संकेत क्या हैं?

निशांत कुमार की इस यात्रा को बिहार की राजनीति में उनके औपचारिक प्रवेश के रूप में देखा जा रहा है। चंपारण से शुरुआत कर वे न सिर्फ ऐतिहासिक विरासत को साधने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि अपने पिता की राजनीतिक शैली को भी आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘सद्भाव यात्रा’ बिहार की सियासत में क्या नया मोड़ लाती है।

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