सीतामढ़ी :- उत्तर बिहार को नई रेल सौगात की तैयारी, बथनाहा, परिहार, सुरसंड भिट्ठामोड़ को पहली बार मिलेगी रेल सुविधा
-- फाइनल सर्वे में कम से कम चार माह लग जाएंगे।
-- चीर प्रतीक्षित रेलखंड को पूरा होने पर सीतामढ़ी जिले के बथनाहा, परिहात व सुरसंड प्रखंड को मिलेगी नई उड़ान,
-- आजादी के बाद पहली बार मिलेगी रेल सुविधा
-- अब तक इन प्रखंडों के लोगों को रेल यात्रा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
सागर कुमार, चम्पारण टुडे (सीतामढ़ी ब्यूरो)
सीतामढ़ी :- उत्तर बिहार में रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में रेलवे ने एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सीतामढ़ी से बथनाहा, सुरसंड, भिट्ठा मोड़ व जयनगर होते हुए निर्मली तक प्रस्तावित 188 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन परियोजना की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। इसके साथ ही रेलवे ने इस परियोजनाओं के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने से पहले अलाइनमेंट के फाइनल सर्वे के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार फरवरी माह में सर्वे एजेंसी के चयन के बाद फील्ड में सर्वे कार्य प्रारंभ किए जाने की संभावना है।
बथनाहा, परिहार ,सुरसंड भिट्ठा मोड़ को पहली बार मिलेगी रेल सुविधा :-
इस प्रस्तावित रेल परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पूरा होने पर सीतामढ़ी जिले के बथनाहा, परिहार, सुरसंड प्रखंड को आजादी के बाद पहली बार मिलेगी रेल सुविधा। अब तक इन प्रखंडों के लोगों को रेल यात्रा के लिए बाजपट्टी, पुपरी या सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। नई रेललाइन के निर्माण से इन तीनों प्रखंड और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। रेल संपर्क स्थापित होने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि लोगों का समय और यात्रा खर्च भी कम होगा।
किसानों, व्यापारियों और यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ :-
सीतामढ़ी-सुरसंड-जयनगर-निर्मली रेललाइन से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गनि मिलने की उम्मीद है। किसानों को अपनी कृषि उपज को बड़े मंडियों और बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत होगी, जिससे उनकी आमदनी बढ़ सकती है। व्यापारियों और छोटे उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से कारोबार को मजबूती मिलेगी। वहीं छात्र, नौकरीपेशा वाले लोग और आम यात्री कम समय में सुरक्षित, सस्ती और सुलभ यात्रा कर सकेंगे। रेल संपर्क बढ़ने से सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन, विशेषकर धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
2008-09 में मिली थी स्वीकृति, 2019 में लग गई थी रोक :-
जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को वर्ष 2008-09 में स्वीकृति दी गई थी। इसका उद्देश्य उत्तर बिहार के सीमावर्ती और अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ना था। हालांकि विभिन्न कारणों से यह परियोजना वर्षों तक कागजों में ही अटकी रही। वर्ष 2019 में रेलवे बोर्ड द्वारा परियोजना पर रोक लगाए जाने से स्थानीय लोगों में निराशा फैल गई थी। लंबे अंतराल के बाद 29 सितंबर 2025 को रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना को पुनः शुरू करने की अनुमति दी, जिसके सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ऐसे गुजरेगी रेल खंड :--
सीतामढ़ी स्टेशन से शुरू रेलखंड आमघाट गुमती के पास 101.7 की0मि0 तक सीधा आएगी, जहाँ से टर्न लेते हुए यह रेल खंड भगवतीपुर, आमघटा, भैरोकोठी, बरियारपुर, रूपा-रुपौली, बथनाहा, माधोपुर, लतीपुर, कोदरकट, दिग्घी,गोनाही, विशनपुर, बेला, परसाकला, दोस्तियां, अड़रिया, फारछहिया, चिलड़ा जायेगा जहाँ सोनबरसा रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है,आगे हरिहरपुर, दलकावा, रजवाड़ा, पकड़िया, दामी, नरगा, परिहार, मसहं, दुलारपुर, बनौली, सुरसंड , भीठामोड़ होते हुये चुरौत के रास्ते जयनगर होते हुए निर्मली जायेगी।
फाइनल सर्वे के लिए टेंडर जारी :-
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम ने बताया कि राज्य सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को पत्र भेजकर इस रेल परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीतामढ़ी - सुरसंड - जयनगर - निर्मली रेललाइन रेललाइन के लिए फाइनल सर्वे से संबंधित निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक सवाल पर मुख्य अभियंता श्री आलम ने बताया कि इस रूट की फाइनल सर्वे में कम से कम चार माह लग जाएंगे। यानि जुलाई 026 तक फाइनल सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा।
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