घोड़ासहन : आखिर किसके संरक्षण में पल रहा है सीमा का 'सफेद चंदन' का काला साम्राज्य?

2000 बोरी खाद की बरामदगी ने सीमांचल में 'सफेद चंदन' बन चुके खाद के कथित काले कारोबार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब प्रशासनिक जांच से मिलने की उम्मीद है।

Jul 12, 2026 - 13:36
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घोड़ासहन : आखिर किसके संरक्षण में पल रहा है सीमा का 'सफेद चंदन' का काला साम्राज्य?

चम्पारण टुडे /सिकरहना /पूर्वी चम्पारण 
घोड़ासहन / बनकटवा / चैनपुर : सीमावर्ती पूर्वी चम्पारण में कभी लकड़ी का "सफेद चंदन" तस्करों की पहली पसंद हुआ करता था। अब जानकारों की मानें तो इस इलाके में सरकारी सब्सिडी वाला खाद ही नया "सफेद चंदन" बन चुका है। जितनी तेजी से इसकी मांग नेपाल सीमा तक बढ़ी है, उतनी ही तेजी से इसके इर्द-गिर्द एक रहस्यमयी नेटवर्क की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। 6 जुलाई की रात जिला प्रशासन, एसएसबी, स्थानीय पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बनकटवा प्रखंड के विभिन्न गांवों से करीब 2000 बोरी उर्वरक बरामद किया गया। जिला प्रशासन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कई व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की गई तथा नकली डीएपी बनाने के मामले का भी खुलासा बताया गया। लेकिन कार्रवाई के बाद अब ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं, जिनकी गूंज गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक सुनाई देने लगी है।

क्या सिर्फ गोदाम बदले, कारोबार नहीं?
स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में खाद बरामद हुआ, तो क्या यह केवल एक खेप थी या लंबे समय से चल रहे किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा? सीमा से जुड़े क्षेत्रों में वर्षों से खाद की असामान्य आवाजाही की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में क्या 2000 बोरी की बरामदगी पूरी कहानी है या किसी बहुत बड़े खेल की केवल पहली परत?

नामों का रहस्य और जांच की दिशा
प्रशासन की प्रेस विज्ञप्ति में जिन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई, उसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि पूरे नेटवर्क की पहचान और उसकी आर्थिक कड़ियों तक जांच पहुंचेगी या नहीं।

यदि खाद वास्तव में इस क्षेत्र का "सफेद चंदन" बन चुका है, तो स्वाभाविक प्रश्न है कि
इतनी बड़ी मात्रा में खाद कहां-कहां से पहुंचता है? भंडारण के लिए गोदाम कौन उपलब्ध कराता है? परिवहन की सूचना किसे रहती है? लाभ की अंतिम कड़ी तक जांच पहुंचेगी या नहीं? 

नकली डीएपी का हुआ खुलासा, जिससे बढ़ी किसानों की चिंता
प्रेस विज्ञप्ति में नकली डीएपी बनाए जाने की बात भी कही गई है। यदि जांच में यह तथ्य सिद्ध होता है, तो यह केवल कालाबाजारी का मामला नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, फसल और सरकारी योजनाओं के साथ गंभीर खिलवाड़ का विषय होगा।

अब निगाहें अगली कार्रवाई पर
एक बड़ी बरामदगी के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल जब्ती और प्राथमिकी तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच होती है।

सीमावर्ती इलाके में "सफेद चंदन" कहे जाने वाले खाद के इस कारोबार पर यदि लगातार और निष्पक्ष कार्रवाई होती है, तो न केवल कालाबाजारी पर अंकुश लग सकता है बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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