घोड़ासहन महोत्सव को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक, पहली बार तीन दिवसीय महोत्सव के आयोजन की बनी रूपरेखा

घोड़ासहन की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं बौद्धिक पहचान को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से पहली बार आयोजित होने जा रहे "घोड़ासहन महोत्सव"  की तैयारियों को लेकर सोमवार को संध्या करीब 6 बजे घोड़ासहन स्थित ज्ञान ज्योति विद्यालय परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से पहुंचे दर्जनों प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षकों, समाजसेवियों, युवाओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर महोत्सव को सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

Jul 13, 2026 - 20:13
Updated: 9 hours ago
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घोड़ासहन महोत्सव को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक, पहली बार तीन दिवसीय महोत्सव के आयोजन की बनी रूपरेखा

घोड़ासहन। घोड़ासहन की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं बौद्धिक पहचान को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से पहली बार आयोजित होने जा रहे "घोड़ासहन महोत्सव"  की तैयारियों को लेकर सोमवार को संध्या करीब 6 बजे घोड़ासहन स्थित ज्ञान ज्योति विद्यालय परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से पहुंचे दर्जनों प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षकों, समाजसेवियों, युवाओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर महोत्सव को सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक की शुरुआत घोड़ासहन के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा स्थानीय प्रतिभाओं को उचित मंच उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने कहा कि घोड़ासहन की पहचान केवल भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां शिक्षा, समाज सेवा, खेल, कला, संस्कृति एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली अनेक प्रतिभाएं मौजूद हैं। ऐसे लोगों को सम्मानित करने तथा नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए इस प्रकार का महोत्सव समय की आवश्यकता है।

बैठक में महोत्सव के प्रारंभिक संयोजन में जुटे "संयोजन मंडल" के सदस्यों को सभी उपस्थित लोगों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि महोत्सव के सफल संचालन के लिए एक व्यापक "आयोजन मंडल" का गठन किया जाएगा, जिसमें घोड़ासहन के प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों, सांस्कृतिक कर्मियों, व्यवसायियों, पत्रकारों तथा विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी एवं सम्मानित लोगों को शामिल किया जाएगा। आयोजन मंडल की विभिन्न समितियां कार्यक्रम की रूपरेखा, व्यवस्थाओं एवं संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि "घोड़ासहन महोत्सव" का आयोजन 14 अगस्त से 16 अगस्त तक तीन दिनों तक किया जाएगा। महोत्सव का उद्देश्य घोड़ासहन की प्रतिभाओं, उपलब्धियों एवं सांस्कृतिक धरोहर को एक साझा मंच प्रदान करना होगा। इस दौरान उन विद्यार्थियों एवं युवाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। साथ ही शिक्षा, समाज सेवा, साहित्य, खेल, कला, संस्कृति एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा गया।

बैठक में महोत्सव की संभावित रूपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकालीन सत्र की शुरुआत सामूहिक योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम से होगी, जिससे स्वस्थ जीवनशैली का संदेश समाज तक पहुंचाया जा सके। वहीं संध्याकालीन सत्र में सम्मान समारोह, सांस्कृतिक संध्या, लोक कला एवं लोक संस्कृति का प्रदर्शन, संगीत, नृत्य तथा स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा युवाओं के लिए प्रेरक व्याख्यान, बौद्धिक परिचर्चा तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन पर भी विचार किया गया।

बैठक में आशीत तिवारी, प्रेम चंद्र प्रसाद, ब्रज मोहन ठाकुर, लालबाबू सिंह, रामपुकार सिन्हा, धर्मेन्द्र सिंह, अनवर अली, बबलू कुमार, जय प्रकाश राम, बिपुल कुमार सहित दर्जनों गणमान्य उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिला तो "घोड़ासहन महोत्सव" आने वाले वर्षों में क्षेत्र की एक पहचान बन जाएगा। यह आयोजन न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को सम्मान देने का माध्यम बनेगा, बल्कि घोड़ासहन की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सकारात्मक पहचान को प्रदेश एवं देश के स्तर पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक के अंत में सभी लोगों ने महोत्सव को सफल बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की। 

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