रामगढ़वा : गर्मी का कहर, सूख रहा चापाकल और बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

चम्पारण टूडे, पूर्वी चम्पारण : रामगढ़वा से विशेष रिपोर्ट पूर्वी चम्पारण के रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र इन दिनों ताप्ती गर्मी और वर्षा की कमी के कारण जल संकट के गंभीर दौर से गुजर रहा है। भीषण गर्मी और लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र के लगभग 45 प्रतिशत चापाकल सूख चुके हैं। इसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोगों को प......

Jul 07, 2025 - 17:36
Updated: 10 months ago
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रामगढ़वा : गर्मी का कहर, सूख रहा चापाकल और बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

चम्पारण टूडे, पूर्वी चम्पारण : रामगढ़वा से विशेष रिपोर्ट
पूर्वी चम्पारण के रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र इन दिनों ताप्ती गर्मी और वर्षा की कमी के कारण जल संकट के गंभीर दौर से गुजर रहा है। भीषण गर्मी और लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र के लगभग 45 प्रतिशत चापाकल सूख चुके हैं। इसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोगों को पड़ोसियों के घरों से पानी भरना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सुबह से लेकर दोपहर तक सिर्फ पानी लाने में ही जुटे रहते हैं। बच्चों का जलपान हो या परिवार के भोजन की तैयारी, सबकुछ अब पानी के इंतज़ार पर टिका है।

नलजल योजना बनी शोपीस :
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी गर्मियों में इसी तरह का जलसंकट देखने को मिला था, तब कुछ हद तक नलजल योजना से राहत मिली थी। लेकिन इस वर्ष नलजल योजना भी अनियमितता का शिकार है। जहां योजना लागू है, वहां भी सप्लाई मनमाने ढंग से होती है। सप्लाई का कोई निश्चित समय नहीं है और बिजली रहने पर ही पानी मिल पाता है।

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल :
ग्रामीणों का आरोप है कि चापाकल सूखने की जानकारी होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। न तो बोरिंग कराया गया है, न ही वैकल्पिक जल स्रोत की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

सुबह-सुबह शुरू होती है पानी की जद्दोजहद :
रामगढ़वा बाजार के आसपास की गलियों में सुबह के समय लोगों को बाल्टी डेग तसला बर्तन आदि लेकर पानी भरते देखा जा सकता है। यह दृश्य अब आम हो चला है। एक बाल्टी पानी के लिए लंबी कतारें लग रही हैं।

अगर बारिश नहीं हुई तो हालात और होंगे बदतर :
इस संकट पर टिप्पणी करते हुए आचार्य सुरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि "अगर आगामी दस दिनों के भीतर बारिश नहीं हुई, तो और अधिक चापाकल सूख जाएंगे। स्थिति और गंभीर हो जाएगी। सावन की पहली फुहार से थोड़ी राहत की उम्मीद है, लेकिन जब तक लगातार बारिश नहीं होती, तब तक जलस्तर का गिरना जारी रहेगा।"

ग्रामीणों ने लगाई गुहार, जल्द हो स्थायी समाधान :
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वे तत्काल प्रभाव से सूख चुके चापाकलों की जांच कर नए बोरिंग कराएं। साथ ही, नलजल योजना को नियमित और भरोसेमंद बनाया जाए, ताकि अगली बार लोगों को इस तरह की परेशानी से ना गुजरना पड़े।

जल ही जीवन है, लेकिन जब यही जीवनदायिनी जल दूर-दराज़ से लानी पड़े, तो गांव के विकास की हकीकत खुद-ब-खुद सामने आ जाती है। प्रशासन कब नींद से जागेगा? यह सवाल अब हर ग्रामीण की आंखों में तैर रहा है।

रिपोर्टर : चम्पारण टूडे संवाददाता
स्थान : रामगढ़वा, पूर्वी चंपारण

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