सुगौली: सिकरहना की बाढ़ ने छोड़ा गहरा जख्म — घटा जलस्तर, पर किसानों का दर्द बढ़ा
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: सिकरहना नदी में आई भीषण बाढ़ का पानी अब रात्रि से धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन तब तक किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर चुका है। सुकुल पाकड़ पंचायत सहित कई पंचायत के किसानों की धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेतों में जहां हरियाली लहरानी चाहिए थी, वहां अब सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। ग्रामीण साहिद अनवर, ऐ......
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: सिकरहना नदी में आई भीषण बाढ़ का पानी अब रात्रि से धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन तब तक किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर चुका है। सुकुल पाकड़ पंचायत सहित कई पंचायत के किसानों की धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेतों में जहां हरियाली लहरानी चाहिए थी, वहां अब सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण साहिद अनवर, ऐनूल्लाह देवान सहित कई लोगों ने बताया कि इस बार की बाढ़ ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया, अब दोबारा खेती करने की स्थिति में नहीं हैं। ग्रामीणों ने विभागीय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लालपरसा धूमनी टोला की तटबंध की मरम्मती समय पर कराई गई होती, तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। लोगों का कहना है कि हर बार वादा किया जाता है, लेकिन मरम्मती का कार्य समय पर नहीं होता, जिसका खामियाजा गरीब किसान भुगतते हैं।
पांचवें दिन भी प्रखंड के कई पंचायतों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा है। गांवों की गलियां कीचड़ से भर गई हैं और कई घरों में अब भी पानी का असर दिख रहा है। किसानों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी तोड़ दिया है। उन्होंने सरकार से शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है ताकि उनका कुछ राहत मिल सके। ग्रामीणों ने कहा कि अब सिर्फ सरकार ही सहारा है, जिससे वे फिर से खेती की राह पर लौट सकें।
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