वाल्मीकिनगर : भारत-नेपाल सीमा पर 143वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन, भक्ति, संस्कृति और सेवा की त्रिवेणी में डूबे श्रद्धालु

गौरव कुमार /चम्पारण टुडे /वाल्मीकिनगर /पश्चिम चम्पारण  वाल्मीकिनगर की पावन धरती एक बार फिर श्रद्धा और संस्कृति के रंग में रंग गई, जब भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बेलवा घाट परिसर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर 143वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत संस्था स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस धार्मिक......

Jun 11, 2025 - 19:57
Updated: 11 months ago
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वाल्मीकिनगर : भारत-नेपाल सीमा पर 143वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन, भक्ति, संस्कृति और सेवा की त्रिवेणी में डूबे श्रद्धालु

गौरव कुमार /चम्पारण टुडे /वाल्मीकिनगर /पश्चिम चम्पारण 
वाल्मीकिनगर की पावन धरती एक बार फिर श्रद्धा और संस्कृति के रंग में रंग गई, जब भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बेलवा घाट परिसर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर 143वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत संस्था स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस धार्मिक-सांस्कृतिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुखिया खूबलाल बड़घड़िया, निर्माता एचेल थारू, कीर्तनकार चंदू खतइत, गायक शिवचंद्र शर्मा, स्वास्थ्यकर्मी कुमारी संगीता, अभिनेता सोनू चौधरी, एवं एसएसबी के त्रिदेव प्रसाद सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

मुख्य अतिथि खूबलाल ने कहा, “यह महाआरती अब इस स्थान की पहचान बन चुकी है। संस्था द्वारा न केवल धार्मिक, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक जागरूकता का भी सतत प्रयास हो रहा है।” वहीं विशिष्ट अतिथि एचेल थारू ने नारायणी नदी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।

फाइटर जयदेव कुमार ने लड़कियों के आत्मरक्षा प्रशिक्षण की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन रहा है। पंडित रामेश्वर तिवारी ने सत्यनारायण कथा के माध्यम से मोक्ष व शांति का संदेश दिया। भजन कीर्तन का भावपूर्ण आयोजन हरे कृष्णा मंडली द्वारा किया गया, जिससे संपूर्ण घाट परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया।

दरिद्र नारायण भोज, पौधारोपण, दिव्यांगजनों की सेवा जैसे सेवाभावी कार्यों को लेकर संस्था को भारत-नेपाल में कई सम्मानों से नवाजा गया है।  
दिल्ली से आए भक्त गोविंदा ने इसे "सेवा का महानतम उदाहरण" बताया।

कार्यक्रम का संचालन एचेल थारू ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन सत्येंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, लेखक, कलाकार, सेवाभावी कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

घाट पर गूंजे जयकारे, गंगा मैया की जय, वाल्मीकि धाम की जय, नारायणी गंडकी माता की जय!  
एक ओर जहां धर्म का आलोक फैला, वहीं सेवा का संकल्प भी लिया गया। संस्था के संगीत आनंद, अंजू देवी व डी. आनंद जैसे समर्पित नेतृत्व ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

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