दूसरे प्रांतों में अटके विद्यार्थियों के सवाल पर घिरे नीतीश, सर्वत्र हो रही आलोचना
मोतिहारी, नरेन्द्र झा। सम्पूर्ण बंदी में बाहर के प्रांतों में फंसे प्रवासी मजदूरों एवं पढ़ाई-लिखाई करने के लिए गए विद्यार्थियों को बिहार वापस बुलाने के मामले में नीतीश कुमार आलोचनाओं के शिखर पर हैं।प्रांत के लोगों के साथ साथ बाहर के प्रांतों में भी नीतीश कुमार के फैसले पर उंगली उठा रहे हैं।
खासकर तब और नीतीश कुमार की आलोचना की जाने लगी जब यूपी सरकार ने अपने यहां के विद्यार्थियों को कोटा से वापस अपने प्रदेश लाने का फैसला किया। बिहार के हजारों विद्यार्थी भी कोटा सहित दिल्ली, जयपुर चेन्नई जैसे शहरों में फंसे पड़े हैं लेकिन बिहार सरकार उन्हें वापस लाने का कोई पहल नहीं की। बिहार के लोग सरकार के इस निर्णय से काफी खफा हैं और इसे नीतीश कुमार की हठधर्मिता बता रहे हैं। इसी तरह बिहार के हजारों मजदूर बिहार से बाहर फंसे हुए हैं।
ये लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर के प्रदेशों में गये थे जहां देशबंदी के बाद इनकी रोजी-रोटी भी छिन गई है और अपने घर भी नही आ पा रहे हैं। इनके सामने विकट स्थिति खड़ी हो गई है। यहां घर वाले शंकाओं के बीच बेचैन हैं वहां घर वापस आने की छटपटाहट में वे लोग नींद हराम कर रहे हैं लेकिन सरकार चैन से सो रही है। मोतिहारी जिला के सैकड़ों विद्यार्थी एवं मजदूर के परिवार वाले बेचैन हैं। कहीं कोई सुनने वाला नही है। बिहार के बाहर अटके विद्यार्थियों के अनेक परिजन स्वयं अपने लड़के को वापस लाने के लिए परमिशन मांग रहे हैं लेकिन उन्हें इसकी स्वीकृति नहीं मिल पा रही है।
लोगों को यह भी नाराजगी है कि सरकार अपने चहेते एवं वीआईपी को इसके लिए स्वीकृति दी है लेकिन आम लोगों की उपेक्षा की जा रही है।लोग मानते हैं कि एहतियात की सभी आवश्यक जांच पड़ताल की औपचारिकता पूरी कर बाहर में फंसे लोगों को बुलाया जा सकता है लेकिन सरकार ऐसा चाह नहीं रही। लोगों का आरोप है कि नीतीश कुमार अपने बिहार के लोगों के प्रति संवेदनशील नहीं है जिसके कारण सभी लोग बाहर के प्रदेशों में जिल्लत भरी जिंदगी काटने को मजबूर हैं।जो भी लोग वहां फंसे हैं उनके हित के लिए सरकार की ओर से कोई कारगर उपाय नही किए गए हैं। सरकार केवल घोषणाएं की है। बाहर में बुरे फंसे अस्सी प्रतिशत लोग परेशानी में हैं। बहरहाल, सरकार की संवेदना नहीं जगी तो नीतीश जी की जगहसाइ तो होगी ही उन्हें अपने घर में भी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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