समस्तीपुर : ग्रामीण युवाओं के लिए डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण संपन्न, 80 से अधिक युवाओं ने लिया भाग, सरकारी योजनाओं से जुड़ने की दी गयी सलाह

रामजी कुमार। समस्तीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बिरौली द्वारा आयोजित पांच दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हो गया। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवतियों को पशुपालन के क्षेत्र में स्वरोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करने हेतु आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण के पहले दिन केंद्र के वरीय वैज्ञानि......

Jul 25, 2025 - 19:42
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समस्तीपुर : ग्रामीण युवाओं के लिए डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण संपन्न, 80 से अधिक युवाओं ने लिया भाग, सरकारी योजनाओं से जुड़ने की दी गयी सलाह

रामजी कुमार।
समस्तीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बिरौली द्वारा आयोजित पांच दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हो गया। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवतियों को पशुपालन के क्षेत्र में स्वरोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करने हेतु आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।
प्रशिक्षण के पहले दिन केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. आर.के. तिवारी ने पशुओं के भोजन प्रबंधन एवं पशुपालन की शुरुआत कैसे करें – इस विषय पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया। दूसरे दिन डॉ. वी.के. गोंड ने पशु आवास व्यवस्था, कृमिनाशक दवाओं का प्रयोग और टीकाकरण प्रणाली पर जानकारी दी। तीसरे दिन डॉ. प्रदीप कुमार ने पशुओं में होने वाली सामान्य और जटिल बीमारियों तथा उनके निदान के उपायों की विस्तृत जानकारी साझा की। चौथे दिन डॉ. नंद ने चारा उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया और बताया कि वर्ष भर पशुओं के लिए हरा चारा कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है।


कार्यक्रम के अंतिम दिन सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने पशुपालकों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, बीमा और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी और उन्हें इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बहुवर्षीय चारा प्रदर्शन इकाई, अजोला उत्पादन इकाई का भी भ्रमण कराया गया। अजोला को पशुओं के लिए पोषक आहार के रूप में कैसे उपयोग किया जाए. इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अंतिम दिन प्रश्नोत्तरी सत्र में प्रतिभागियों ने पशुपालन से संबंधित अनेक सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सटीक समाधान दिया गया।
इस कार्यक्रम से ग्रामीण युवाओं को न केवल पशुपालन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी मिली, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।

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