सीतामढ़ी :- सीतामढ़ी - कुंडवा चैनपुर रेलखंड पर डबलिंग रेल लाइन का टेंडर प्रक्रिया की समय सीमा तय, डी.ची.ई
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, (सीतामढ़ी ब्यूरो) सीतामढ़ी :- सीतामढ़ी - रक्सौल रेलखंड के सीतामढ़ी - कुंडवा चैनपुर रेलवे स्टेशन के बीच 39 किलो मीटर रेलखंड का दोहरीकरण होने की टेंडर की समय सीमा जनवरी में रखा गया है। इस रेल खंड की दोहरी कारण रेलवे लाइन पर प्रथम फेज पर 713 करोड़ रु.......
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, (सीतामढ़ी ब्यूरो)
सीतामढ़ी :- सीतामढ़ी - रक्सौल रेलखंड के सीतामढ़ी - कुंडवा चैनपुर रेलवे स्टेशन के बीच 39 किलो मीटर रेलखंड का दोहरीकरण होने की टेंडर की समय सीमा जनवरी में रखा गया है। इस रेल खंड की दोहरी कारण रेलवे लाइन पर प्रथम फेज पर 713 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है। जबकि रेल्वे द्वारा 12 सौ करोड़ खर्च होने की अनुमान है। इस परियोजना टेंडर के तहत नए प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, प्रक्रिया की समय सीमा की मुहर लग गई है। फुट ओवरब्रिज, सर्विस बिल्डिंग, माल गोदाम, मुख्य पुल व छोटे पुलों का निर्माण किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि 22 जनवरी है और परियोजना के लिए 920 दिन का समय निर्धारित किया गया है। दोहरीकरण के बाद इस रूट पर यात्री और मालगाड़ियों के आवागमन में सुविधा बढ़ेगी, समय की बचत होगी और नेपाल एवं उत्तर-पूर्व भारत के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
साथ ही, क्षेत्रीय औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलखंड के दोहरीकरण के दौरान कई आधुनिक निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसमें नए प्लेटफार्म, फुट ओवर ब्रिज, सर्कुलेटिंग एरिया, सर्विस बिल्डिंग, माल गोदाम, मुख्य पुल और छोटे पुलों के निर्माण का कार्य शामिल है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन के आस-पास के क्षेत्रों में भी यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा।
यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ :-
सीतामढ़ी- रक्सौल रेलखंड के सीतामढ़ी - कुंडवा चैनपुर दोहरीकरण से यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। इस रूट पर ट्रेनों का अधिक से अधिक परिचालन संभव हो सकेगा, जिससे यात्रा समय में कमी आएगी। साथ ही, भीड़ भाड़ के समय ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी।
उत्तर-पूर्व भारत और नेपाल से मजबूत होगी कनेक्टिविटी :-
रेलखंड के दोहरीकरण के बाद यह रूट उत्तर-पूर्व भारत और नेपाल से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। नॉर्थ-ईस्ट के लिए चलने वाली कई ट्रेनों को अब अधिक सुगमता से संचालित किया जा सकेगा। इससे न केवल क्षेत्रीय यातायात में सुधार होगा बल्कि सीमा पार व्यापारिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
आर्थिक और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा :-
परियोजना से सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। दोहरीकरण के बाद मालगाड़ियों की आवाजाही सुचारू होगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को लाभ पहुंचेगा। क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
क्या कहते है अधिकारी :-
इस बाबत पूछे जाने पर डिप्टी चिपिंजिनियर अभय कुमार मिश्रा ने इसकी पुष्टि की है।
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