सीतामढ़ी :- रेलवे की गर्त में दबा सीतामढ़ी - निर्मली रेलखंड निर्माण का मामला, अधिकारी कुव्यवस्था के कारण नहीं हो सका 188 किलो मीटर रेलखंड का निर्माण
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,, सीतामढ़ी :- रेलवे के गर्त में दब कर रह गई मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी से निर्मली भाया सुरसंड, जयनगर 188.9 किलो मीटर लम्बी न्यू रेलखंड। इस नवनिर्मित होने वाली रेलखंड को निर्माण को लेकर अब स्थानीय स्तर पर लोगो कीआवाज उठने लगी है। जिसको लेकर जदयू के वरिष्ठ नेता विमल......
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,,
सीतामढ़ी :- रेलवे के गर्त में दब कर रह गई मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी से निर्मली भाया सुरसंड, जयनगर 188.9 किलो मीटर लम्बी न्यू रेलखंड। इस नवनिर्मित होने वाली रेलखंड को निर्माण को लेकर अब स्थानीय स्तर पर लोगो कीआवाज उठने लगी है। जिसको लेकर जदयू के वरिष्ठ नेता विमल शुक्ल के नेतृत्व में मिथिला रेलवे उपभोक्ता संघ के संयोजक संतोष कुमार शोले ने दिल्ली स्थित संसद देवेश चंद्र ठाकुर के नवीन आवास सीतायन पर मिलकर उनके माध्यम से रेल मंत्री से लंबित परे सीतामढ़ी - निर्मली भाया सुरसंड रेलखंड निर्माण की मांग की है। तथा उन्होंने आवेदन के माध्यम से बताया कि सुरसंड - भिट्ठामोड़ भारतीय क्षेत्राधिकार का एक ऐसा एरिया है, जो भारत - नेपाल बार्डर से सटे है। आजादी के बाद अभी तक इस श्रेत्र में रेलवे नहीं पहुंच पाई है। यहां के स्थानीय लोग महानगर में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या दूर बसे अपने रिश्ते दारो के पास या परदेश रेल के माध्यम से जाने के लिए हो या स्वास्थ्य संबंधित इलाज को महानगरी जाने के लिए उन्हें पहले सीतामढी या जनकपुर रोड पुपरी रेलवे स्टेशन पहुंचना पड़ता है। जिसकी दूरी कमोबेश 75 से 90 किलो मीटर की होती है। ऐसे परिस्थिति में इस श्रेत्र में रेलवे का होना कितना जरूरी है, इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रेलवे की गर्त में दबे इस रेल खंड को निर्माण के लिए रेलवे द्वारा जो एरिया क्षेत्र को दर्शाया गया है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। अगर रेलवे इन क्षेत्रों से होकर अगर लंबित इस रेलखंड की निर्माण करती है तो आम लोगों से लेकर देश की सुरक्षा में यह रेलखंड एक अहम जिम्मेवारी उठाती नजर आएगी। इस नवनिर्मित होने वाली 188.9, किलो मीटर लम्बी रेलखंड में 88 किलो मीटर का श्रेत्र सिर्फ तो सिर्फ सीतामढ़ी की आती है। जहां आजादी के बाद अभी तक रेलवे नहीं पहुंच सकी है।
ऐसे गुजरेगी रेल खंड :--
सीतामढ़ी स्टेशन से शुरू रेलखंड आमघाट गुमती के पास 101.7 की0मि0 तक सीधा आएगी, जहाँ से टर्न लेते हुए यह रेल खंड भगवतीपुर, आमघटा, भैरोकोठी, बरियारपुर, रूपा-रुपौली, बथनाहा, माधोपुर, लतीपुर, कोदरकट, दिग्घी,गोनाही, विशनपुर, बेला, परसाकला, दोस्तियां, अड़रिया, फारछहिया, चिलड़ा जायेगा जहाँ सोनबरसा रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है,आगे हरिहरपुर, दलकावा, रजवाड़ा, पकड़िया, दामी, नरगा, परिहार, मसहं, दुलारपुर, बनौली, सुरसंड , भीठामोड़ होते हुये चुरौत के रास्ते जयनगर होते हुए निर्मली जायेगी।
तब इस प्रस्तावित रेलखंड को निर्माण होने के बाद रेल खंड के आजू बाजू में बसे बाजार में व्यापार करने वाले लोगों को विशेष फायदा होगा, जो दुकानदार अपने व्यापार को लेकर जिला मुख्यालय से समान परचेज यानी खरीददारी करते है, ओ अपने व्यापार के लिए सीधा महानगर से जुड़ेंगे और जम कर अपनी व्यापार करेंगे। जिसका फायदा आम लोगों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि दूसरी बड़ी फायदा उन बच्चों को होगा जो अपनी पठन पाठन की तैयारी को लेकर राज्य के दूसरे तीसरे जिला मुख्यालय में बैठ कर तैयारियां करते हैं ओ सीधा महानगरों में बैठकर अपनी पठन पाठन को बेहतर करेंगे, वही ओ तीसरा फायदा भी बताया की पड़ोसी देशों की खराब नियति के समय यह रेलखंड देश की सुरक्षा में भी अपनी अहम भूमिका निभा सकते है।
उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी - निर्मली वाया सुरसंड - जयनगर रेलवे लाइन एक भारतीय रेलवे द्वारा पूर्व मध्य रेलवे ज़ोन में पूर्व प्रस्तावित रेलवे लाइन है । इसकी घोषणा पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2008 में की थी। उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर 2008 को सुरसंड जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल कालेज में इस प्रस्तावित रेलवे लाइन का शिलान्यास किया था। प्रस्तावित इस रेलखंड की लंबाई 188.9 किमी बताया गया था। सरकारी व्यवस्था की लापरवाही के कारण पिछले 17 वर्षों में यह रेलवे लाइन का निर्माण अभी तक पूरी नहीं हुई है।
वर्ष 2022 में, मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के सांसद और भाजपा नेता अशोक कुमार यादव द्वारा प्रस्तावित रेलखंड को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा गया था । तब केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उक्त रेलखंड निर्माण को लेकर आश्वासन भी दिया गया था, और जल्द इस परियोजना को पूरा कराने की बात कही गई थी।
मांग को देखते हुए सीतामढ़ी के वर्तमान सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने इसकी प्रगति का आश्वासन दिया।
बताया कि दिसंबर 2012 को रेलवे द्वारा 21 किलो मीटर लैंड प्लान जमा कराने के बाद जिला भू-अर्जन बिभाग ने 21 किलो मीटर का भूअर्जन करने को लेकर 105 करोड़ की राशि की मांग किया था, तब रेलवे द्वारा मात्र 14 करोड़ की राशि जिला भू-अर्जन को बतौर चेक जनवरी 2013 को जमा किया था, पैसा
आवंटित होने के बाबजूद भूमि अधिग्रहण को लेकर सम्बंधित बिभाग को पूरा पैसा नहीं मिल सका और काम रुक गया, अब 21 किलो मीटर में भूअर्जन को लेकर सम्बंधित बिभाग द्वारा अब 105 के जगह पर 275 करोड़ की मांग कर रही है।
लेकिन रेल प्रशासन द्वारा अभी तक कोई सुनबाई नहीं है,ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत सरकार के साथ स्थानीय जन प्रतिनिधियों को इस रेल खंड से कोई मतलब नहीं रह गया हो। जो आने वाले समय में यह रेलखंड देश की लाइफ लाइन यानि सुरक्षा में मददगार बन सकती है।
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