सीतामढ़ी :- गन्नामूल्य के बकाये भुगतान पर इवेंट नही शीघ्र पेमेंट कराये सरकार
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,, सीतामढ़ी(रीगा) :- चीनी मिल से जुडे किसानों के गन्नामूल्य के बकाये पर इवेंट नही शीघ्र पेमेंट कराने की मांग को लेकर संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, उतर बिहार के संयोजक डा.आनन्द किशोर, जिलाध्यक्ष जलंधर यदुबंशी, रीगा अध्यक्ष पारसनाथ सिंह ने डी एम सीतामढी को मेल भेजते हुए प्रतिलिपि मु.......
-- भुगतान हेतू रीगा चीनी मिल परिसर में कैम्प लगाया जाय।
-- 16564 किसानों की सूंची से बंचित किसानों का आवेदन लेकर उनका भी भुगतान सुनिश्चित हो।
सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,,
सीतामढ़ी(रीगा) :- चीनी मिल से जुडे किसानों के गन्नामूल्य के बकाये पर इवेंट नही शीघ्र पेमेंट कराने की मांग को लेकर संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा, उतर बिहार के संयोजक डा.आनन्द किशोर, जिलाध्यक्ष जलंधर यदुबंशी, रीगा अध्यक्ष पारसनाथ सिंह ने डी एम सीतामढी को मेल भेजते हुए प्रतिलिपि मुख्य मंत्री, बिहार, गन्ना विकास मंत्री तथा ईंखायुक्त बिहार को भी भेजा है।
मेल मे कहा गया है कि पत्रांक -47 दिनांक 29 मई को ईंखायुक्त के आदेश के आलोक में 16564 गन्ना किसानो के बकाये 51.30करोड का त्वरित भुगतान होना है। पता चला है कि दो माह में मात्र 1% किसानो का भुगतान हुआ है। वर्षों से परेशान तथा सूखाग्रस्त किसानों में बडी चिंता है कि इस रफ्तार से भुगतान में महीनों लग जायेंगे।
मोर्चा नेताओ ने कहा है कि 11 जुलाई को गन्ना विकास मंत्री विभागीय तथा जिला के आला अधिकारियों के साथ भारी भारखम तामझाम के साथ गन्नामूल्य बकाये के भुगतान का रीगा में इवेंट बनाया परन्तु आजतक पेमेंट नही हुआ।
यह भी पता चला है कि सत्यापनकर्मियों द्वारा भी अधूरे कागजात जमा करने तथा किसानों से पैन तथा अन्य कागजातों की मांग से भुगतान में कठिनाई हो रही है। किसान का सबसे बडा सबूत है गन्ना कानून के तहत रीगा चीनी मिल को गन्ना की आपूर्ति का चालान फिर एन सी एल टी न्यायालय द्वारा किसानों की सूंची विभाग को आई है और वह सूंची चीनी मिल प्रबंधन द्वारा भेजा गया है।
संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा पहले भी मांग किया था कि गन्नामूल्य भुगतान का केन्द्र रीगा चीनी मिल को बनाया जाए वहीं कैम्प लगाकर सभी संबंधित अधिकारी कार्य करें।क्योंकि वहां मिल के पास सारा रिकार्ड है तथा मिल के पुराने अधिकारी- कर्मचारी सभी किसानों को जानते भी हैं वहां किसान भी पहुंचकर अपनी कठिनाईयों का सहज ढंग से निष्पादन करा सकेंगे।
मोर्चा नेताओ ने यह भी सवाल उठाया है कि कुछ वैसे भी किसान है जिनका नाम16564 किसानो की सूंची में नही है प्रशासन वैसे किसानों का भी आवेदन तथा चालान मिल में जमा कराये तथा उनका भुगतान भी सुनिश्चित कराये क्योंकि सूंची मे नाम नही होने के लिए किसान दोषी नही है,सूंची भेजने वाला दोषी है।किसान तो गन्ना कानून के तहत गन्ना आपूर्ति कर 8-9वर्ष से दर-दर भटक रहा है उसे तो न्याय मिलना हीं चाहिए।
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