स्त्री से प्रेम - ऋषिकेश सारस्वत
“स्त्री से प्रेम” एक भावपूर्ण कविता है, जो बताती है कि स्त्री से प्रेम केवल उसकी सुंदरता, नयन-नक्श या रंगत से नहीं, बल्कि उसकी आवाज़ सुनने, भावनाओं को समझने और उसकी सीरत का सम्मान करने से होता है। © ऋषिकेश सारस्वत
स्त्री से प्रेम
सिर्फ, उसकी नयन - नक़्श नहीं
न ही उसकी रंगत
न ही चेहरे की बनावट
स्त्री से प्रेम
कभी उसको सुनना भी है।
प्रकृति से
स्त्रियों की सूरत व श्रृंगार की तुलना
सिर्फ स्त्री से प्रेम नहीं,
बल्कि, उसके सीरत को समझना भी
स्त्री से प्रेम होना है।
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