स्त्री से प्रेम - ऋषिकेश सारस्वत

“स्त्री से प्रेम” एक भावपूर्ण कविता है, जो बताती है कि स्त्री से प्रेम केवल उसकी सुंदरता, नयन-नक्श या रंगत से नहीं, बल्कि उसकी आवाज़ सुनने, भावनाओं को समझने और उसकी सीरत का सम्मान करने से होता है। © ऋषिकेश सारस्वत

Sep 20, 2026 - 19:05
Updated: 23 days ago
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स्त्री से प्रेम - ऋषिकेश सारस्वत

स्त्री से प्रेम

सिर्फ, उसकी नयन - नक़्श नहीं

न ही उसकी रंगत

न ही चेहरे की बनावट

स्त्री से प्रेम 

कभी उसको सुनना भी है।

प्रकृति से

स्त्रियों की सूरत व श्रृंगार की तुलना

सिर्फ स्त्री से प्रेम नहीं,

बल्कि, उसके सीरत को समझना भी

स्त्री से प्रेम होना है।

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