कड़े सुरक्षा पहरे व भंसार की दोहरी मार, घोड़ासहन सहित सीमावर्ती बाजारों में पसरा सन्नाटा, व्यापार 70 फीसदी टूटा
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों (SSB और APF) की कड़ी जांच और नेपाल के सख्त कस्टम (भंसार) नियमों के कारण घोड़ासहन सहित सीमावर्ती बाजारों का व्यापार 70% तक गिर गया है। नेपाल सरकार द्वारा ₹5,000 से अधिक के निजी व घरेलू सामान पर भी टैक्स अनिवार्य करने से नेपाली खरीदारों ने भारतीय बाजारों से दूरी बना ली है और वे अपने स्थानीय बाजारों से खरीदारी को मजबूर हैं। 80% नेपाली ग्राहकों पर निर्भर कपड़ा, किराना और बर्तन व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी और कर्ज का भारी संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते व्यापारियों ने दोनों देशों के प्रशासन से आम उपभोक्ताओं के लिए नियमों में ढील देने की मांग की है।
घोड़ासहन (पूर्वी चंपारण): भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सख्ती और नेपाल सरकार के कड़े कस्टम (भंसार) नियमों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। भारतीय सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और नेपाल सीमा पर आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) की लगातार सघन जांच के चलते घोड़ासहन समेत आसपास के प्रमुख बाजारों से नेपाली ग्राहक पूरी तरह नदारद हैं। दशकों से सीमा पार के खरीदारों के दम पर गुलजार रहने वाले इन बाजारों में अब सन्नाटा पसरा है और कारोबार 70 फीसदी तक लुढ़क गया है।
व्यापारियों के अनुसार, मंदी का सबसे बड़ा कारण नेपाल कस्टम का नया प्रावधान है। नेपाल प्रशासन ने 5,000 नेपाली रुपये से अधिक के सामान पर भंसार अनिवार्य कर दिया है। यह नियम केवल व्यवसायियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के निजी व घरेलू सामान पर भी सख्ती से लागू किया जा रहा है।
शादी-ब्याह, त्योहार या दैनिक उपयोग के लिए राशन व कपड़े खरीदने भारत आने वाले नेपाली नागरिकों से सीमा पर ही भारी टैक्स वसूला जा रहा है। कस्टम चुकाने के बाद सामान महंगा पड़ने लगा है, जिसके चलते नेपाली उपभोक्ता भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बजाय अपने ही देश के स्थानीय बाजारों से ऊंची दरों पर खरीदारी करने को विवश हैं। जांच प्रक्रिया से सामान्य ग्राहकों में हिचक सीमा पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन तलाशी अभियान ने भी आवाजाही को सीमित कर दिया है। हर आने-जाने वाले की पहचान जांच और पूछताछ के डर से सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भारतीय बाजारों का रुख करने से बच रहे हैं। लगन और त्योहारों के समय जिन दुकानों पर ग्राहकों की कतारें लगती थीं, वहां अब दिनभर में इक्का-दुक्का खरीदार ही पहुंच रहे हैं।
घोड़ासहन बाजार के कपड़ा, किराना, कॉस्मेटिक्स, हार्डवेयर और बर्तन व्यवसाय पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उनका 80 प्रतिशत व्यापार नेपाल के रौतहट, बारा और सर्लाही जिलों पर आश्रित है। दुकानों में माल अटा पड़ा है, बिक्री शून्य हो चुकी है, जबकि बैंक का ब्याज, दुकानों का भारी-भरकम किराया और कर्मचारियों का खर्च निकालना दूभर हो गया है।
स्थानीय व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सदियों पुराना ‘रोटी-बेटी’ और सामाजिक-आर्थिक संबंध है। यदि आम उपभोक्ताओं के लिए सीमा शुल्क नियमों में ढील और सीमा पर मानवीय राहत नहीं दी गई, तो सीमावर्ती कस्बों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। व्यापारियों ने दोनों देशों के उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

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