मोतिहारी : घोड़ासहन में रेलवे की एक एकड़ से अधिक जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा, मूकदर्शक बना विभाग 

मोतिहारी (घोड़ासहन) - इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे मोतिहारी के घोड़ासहन बाजार में रेलवे की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे का खेल ज़ोरों पर है। एक-एक इंच ज़मीन पर भूमाफियाओं की गिद्ध नज़र है और रेलवे विभाग अनजान बना ......

Aug 04, 2025 - 10:41
Updated: 9 months ago
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मोतिहारी : घोड़ासहन में रेलवे की एक एकड़ से अधिक जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा, मूकदर्शक बना विभाग 

मोतिहारी /बिहार। 
मोतिहारी (घोड़ासहन) - इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे मोतिहारी के घोड़ासहन बाजार में रेलवे की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे का खेल ज़ोरों पर है। एक-एक इंच ज़मीन पर भूमाफियाओं की गिद्ध नज़र है और रेलवे विभाग अनजान बना हुआ है, या यूँ कहें कि जानबूझकर आंख मूंदे हुए है।

कैसे हो रहा कब्जा? :
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल की शुरुआत झुग्गियों और छतरियों से होती है। धीरे-धीरे ये अस्थायी ठिकाने पक्के दुकानों में बदल जाते हैं। कुछ ही महीनों में लोहे की संरचना वाले स्थायी भवन बना दिए जाते हैं, और फिर इनपर लाखों में ‘पगड़ी’ लेकर दुकानें किराए पर चढ़ा दी जाती हैं।

एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जा
बॉन्ड पेपर पर खुलेआम एग्रीमेंट
2 लाख तक की पगड़ी वसूली
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत
रेलवे अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

भू-माफिया बना रहे मोटा मुनाफा :
माफिया पहले दुकानदारों को सस्ते किराए पर जगह देते हैं, फिर धीरे-धीरे पक्के निर्माण कराके मोटा किराया और पगड़ी वसूलने लगते हैं। कई स्थानों पर तो जमीन की बिक्री तक कर दिए जाने की बात कही जा रही है, जबकि वह पूरी तरह रेलवे की संपत्ति है।

प्रशासन की मिलीभगत? :
सूत्रों का दावा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर रेलवे के कुछ अफसर तक इस गोरखधंधे में शामिल हैं। रेलवे के अधिकारी समय से पहले अपनी ‘सहयोग राशि’ ले लेते हैं, और निरीक्षण के बाद माफिया फिर से सक्रिय हो जाते हैं। कई बार मापी भी हुई, लेकिन रसूख के आगे सबकुछ दबा दिया गया।

क्या बोले अधिकारी? :
आरपीएफ इंस्पेक्टर ने पल्ला झाड़ते हुए कहा, "इस मामले में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से बात करें।"

रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के एईएन ने कहा, "मामले की जांच-पड़ताल कराई जाएगी।"

उठ रहा सवाल :
क्या रेलवे की करोड़ों की जमीन ऐसे ही बिकती रहेगी?
क्या प्रशासन की चुप्पी साज़िश नहीं है?
क्या जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती होगी?

लोगो की मांग :
रेलवे बोर्ड और ज़ोनल मुख्यालय को इस मामले की सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच करानी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।

यह मामला सिर्फ ज़मीन का नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था की साख का भी है।

आपके क्षेत्र की कोई खबर है? बताइए हमें - चम्पारण टुडे आपके साथ है।

अमर उजाला के वेब पेज से Original Link : https://www.amarujala.com/bihar/muzaffarpur/shops-are-being-built-by-occupying-railway-land-illegal-business-continues-with-the-connivance-of-mafia-2025-08-03

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