सिकरहना : बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट 11वी की नामांकन में घोड़ासहन का ठाकुर राम मथुरा प्रसाद उच्च विद्यालय बना अव्वल, तीसरी सूची तक सर्वाधिक नामांकन कर रचा कीर्तिमान
बिहार बोर्ड द्वारा इंटर प्रथम वर्ष में नामांकन के लिए जारी तीसरी सूची के बाद, घोड़ासहन प्रखंड के ठाकुर राम मथुरा प्रसाद उच्च विद्यालय ने सबसे अधिक नामांकन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस विद्यालय में आर्ट्स में 192/220 और साइंस में 100/120 सीटें भर चुकी हैं। महंथ रामजी दास शशि भूषण दास कन्या विद्यालय दूसरे स्थान पर रहा, जहां आर्ट्स में 184/259 और साइंस में 52/120 नामांकन हुए। तीसरे स्थान पर मिडिल स्कूल घोड़ासहन रहा, जहां आर्ट्स में 103/120 और साइंस में 74/120 छात्रों ने नामांकन लिया। हालांकि कुछ विद्यालयों में नामांकन बहुत कम हुआ है। इस वर्ष तीसरी सूची के बाद भी कई सीटें खाली रह गई हैं, जो शिक्षा प्रणाली के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार, निजी स्कूलों की ओर छात्रों का रुझान और तकनीकी शिक्षा की बढ़ती मांग इसके कारण हो सकते हैं।
चम्पारण टुडे /घोड़ासहन /पूर्वी चम्पारण।
मोतीहारी (घोड़ासहन) : बिहार बोर्ड द्वारा इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष (11वीं कक्षा) में नामांकन हेतु जारी तीसरी सूची के बाद घोड़ासहन प्रखंड के विद्यालयों में नामांकन की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। इस बार सबसे अधिक नामांकन दर्ज कर घोड़ासहन का ठाकुर राम मथुरा प्रसाद उच्च विद्यालय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह विद्यालय क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन करता आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय में आर्ट्स संकाय में कुल 220 सीटों में से 192 सीटों पर नामांकन हो चुका है, जबकि साइंस संकाय की 120 सीटों में से 100 सीटों पर छात्रों का नामांकन हुआ है। यह आँकड़ा इसे तीसरी सूची के बाद क्षेत्र का सर्वोच्च नामांकन प्राप्त करने वाला विद्यालय बनाता है।
दूसरे स्थान पर रहा महंथ रामजी दास शशि भूषण दास प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय, घोड़ासहन। यहां आर्ट्स की कुल 259 सीटों में से 184 सीटों पर नामांकन हुआ, जबकि साइंस संकाय की 120 सीटों में 52 सीटों पर ही छात्रों का नामांकन हुआ है।
तीसरे स्थान पर रहा मिडिल स्कूल घोड़ासहन, जहां आर्ट्स की 120 सीटों में से 103 और साइंस की 120 सीटों में से 74 छात्रों का नामांकन दर्ज हुआ है। यह तीनों विद्यालय घोड़ासहन बाजार के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में अवस्थित हैं।
इसके अतिरिक्त, पुरनहिया, लौखान, समनपुर, टोनवा सहित अन्य विद्यालयों में भी नामांकन की स्थिति संतोषजनक रही है। हालांकि कुछ विद्यालयों में नामांकन की संख्या काफी कम दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष के तीसरी सूची के बाद भी कई विद्यालयों में अपेक्षाकृत अधिक सीटें रिक्त रह गई हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों की बदलती प्राथमिकताएं, निजी विद्यालयों का आकर्षण, और तकनीकी शिक्षा की ओर झुकाव इसके पीछे मुख्य कारण हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों का मानना है कि शासकीय विद्यालयों में आधारभूत संरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, तो सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में फिर से वृद्धि देखी जा सकती है।
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