सुगौली: मधुमक्खी बचाओ, कृषि उत्पादन बढ़ाओ

अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली,पू.च: कभी गाँव की पगडंडियों पर चलते हुए पेड़ों पर लटकते मधुमक्खियों के छत्ते आम दृश्य हुआ करते थे। हवा में उनकी भिनभिनाहट और फूलों पर उनका मंडराना पर्यावरण की सुंदरता में चार चाँद लगा देता था। लेकिन आज कीटनाशकों के अ.....

Oct 21, 2025 - 17:00
Updated: 7 months ago
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सुगौली: मधुमक्खी बचाओ, कृषि उत्पादन बढ़ाओ

अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली,पू.च: कभी गाँव की पगडंडियों पर चलते हुए पेड़ों पर लटकते मधुमक्खियों के छत्ते आम दृश्य हुआ करते थे। हवा में उनकी भिनभिनाहट और फूलों पर उनका मंडराना पर्यावरण की सुंदरता में चार चाँद लगा देता था। लेकिन आज कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग,वनों की कटाई और प्रदूषण ने इन नन्हीं जीवों के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। लेखक एवं पर्यावरण प्रेमी डॉ. प्रमोद स्टीफन बताते हैं कि मधुमक्खियाँ केवल शहद उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था की रीढ़ हैं। वे फूलों का परागण कर फसलों की पैदावार को कई गुना बढ़ा देती हैं।

 वैज्ञानिक शोधों के अनुसार यदि मधुमक्खियाँ समाप्त हो जाएँ, तो दुनिया की एक-तिहाई फसलें नष्ट हो जाएँगी। मधुमक्खी संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए 19 अक्टूबर 2025 को मल्टी एग्रो प्रोडक्ट्स विलेज बंगरा, वार्ड नंबर 19, सुगौली में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन एस. पी. नायक कॉलेज, सुगौली के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. शत्रुघ्न पाठक ने किया। कार्यक्रम में समाजसेवी अजहर हुसैन अंसारी ने बताया कि वहाँ मधुमक्खी पालन के लिए 20 आधुनिक बक्सों की व्यवस्था की गई है।

इन बक्सों को इस तरह बनाया गया है कि चींटियाँ, छिपकलियाँ और अन्य कीट मधुमक्खियों को नुकसान न पहुँचा सकें। छत पर एस्बेस्टस और बाँस के ढाँचे के साथ धूपघड़ी लगाई गई है ताकि यह स्थान सौंदर्य और उपयोगिता दोनों दृष्टि से आकर्षक बने। इस मौके पर अशोक वर्मा, आशारानी लाल,लिली स्टीफन, पिंकी कुमारी,डॉ. प्रवीण स्टीफन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। डॉ. स्टीफन ने कहा कि बाँस या लकड़ी के छोटे छत्तों से ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से शुरू किया जा सकता है।

 इससे न केवल शुद्ध शहद का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि यदि हमें हरियाली और कृषि दोनों को बचाना है, तो मधुमक्खियों का संरक्षण हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मधुमक्खी बचाओ, कृषि उत्पादन बढ़ाओ यही जीवन का सच्चा मंत्र है।

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