रामगढ़वा। नवनिर्माण श्री शंकर मंदिर की वर्षगांठ पर श्रद्धालुओं भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ किया हनुमान आराधना व बर्थडे का आयोजन
चम्पारण टूडे | पूर्वी चम्पारण (रामगढ़वा) रामगढ़वा बाजार स्थित ऐतिहासिक श्रीशंकर मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार, 26 फरवरी 2026 को भव्य प्रथम वर्षगांठ समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अवसर पर हनुमान आराधना, महाआरती एवं “बर्थडे” कार्यक्रम ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
चम्पारण टूडे | पूर्वी चम्पारण (रामगढ़वा)
रामगढ़वा बाजार स्थित ऐतिहासिक श्रीशंकर मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार, 26 फरवरी 2026 को भव्य प्रथम वर्षगांठ समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अवसर पर हनुमान आराधना, महाआरती एवं “बर्थडे” कार्यक्रम ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भगवान शिव-पार्वती की आकर्षक झांकी और हनुमान आराधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। देर संध्या महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भक्तों के बीच महाप्रसाद के साथ केक वितरण भी किया गया, जो इस आयोजन की विशेष पहल रही। आयोजकों ने बताया कि रामगढ़वा की पावन धरती पर मंदिर स्थापना दिवस को “बर्थडे” के रूप में मनाने की यह ऐतिहासिक और अनूठी शुरुआत है।
कार्यक्रम की सफलता में पूजा समिति और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महाप्रसाद भंडारे की व्यवस्था में कृष्णा प्रसाद गुप्ता, हरिनारायण प्रसाद, रवि कुमार, बिट्टू कुमार, मुन्ना कुमार आर्यन, रविन्द्र गुप्ता, मुन्ना कुमार तुफानी, मुकेश कुमार सहित कई समाजसेवियों ने सक्रिय योगदान दिया।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र थानाध्यक्ष राजीव साह, एसआई सुमित कुमार, अजीत सिंह तथा सशस्त्र बल के जवानों एवं चौकीदारों ने गश्ती अभियान चलाया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
मंदिर के व्यवस्थापक हरिनारायण प्रसाद एवं रवि कुमार ने बताया कि मंदिर स्थापना के एक वर्ष पूर्ण होने पर क्षेत्र में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि 26 फरवरी 2026 को आयोजित यह भव्य हनुमान आराधना और वर्षगांठ समारोह रामगढ़वा के धार्मिक इतिहास में एक नई पहल के रूप में याद किया जाएगा।
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