मोतिहारी : पानी संकट में मसीहा बनकर उभरे ई. संजय कुमार, टैंकर से गांवों में पहुंचा रहे राहत, विनम्रता से जीता लोगों का दिल
पी कुमार /चम्पारण टुडे /मोतिहारी /पूर्वी चम्पारण। जब पूरा बिहार गर्मी की तपिश और जलसंकट की मार झेल रहा है, तब पताहीं प्रखंड के गांवों में ई. संजय कुमार एक मसीहा बनकर सामने आए हैं। पानी के अभाव में तड़पते ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के लिए वे टैंकरों के माध्यम से गांव-गांव पानी की आपूर्ति करा रहे हैं। ऐसे समय में जब सरकारी सिस्टम जवाबदेही से दूर है, ई. संजय कुमार ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए अपने संसाधनों से लोगों की प्यास बुझाने की .......
पी कुमार /चम्पारण टुडे /मोतिहारी /पूर्वी चम्पारण।
जब पूरा बिहार गर्मी की तपिश और जलसंकट की मार झेल रहा है, तब पताहीं प्रखंड के गांवों में ई. संजय कुमार एक मसीहा बनकर सामने आए हैं। पानी के अभाव में तड़पते ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के लिए वे टैंकरों के माध्यम से गांव-गांव पानी की आपूर्ति करा रहे हैं। ऐसे समय में जब सरकारी सिस्टम जवाबदेही से दूर है, ई. संजय कुमार ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए अपने संसाधनों से लोगों की प्यास बुझाने की पहल की है।
पताहीं प्रखंड के दर्जनों गांव इन दिनों जल संकट से जूझ रहे हैं। नल-जल योजना धरातल पर दम तोड़ चुकी है, चापाकलों में पानी सूख गया है, और कई इलाकों में पानी के लिए महिलाएं-पुरुष दिनभर भटकने को मजबूर हैं। ऐसे विकट समय में ई. संजय कुमार ने टैंकर सेवा शुरू कर लोगों के बीच राहत पहुंचाने का जो कार्य किया है, वह सराहनीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी है।
ई. संजय कुमार जन सुराज से जुड़े नेता हैं और चिरैया विधानसभा से संभावित प्रत्याशी माने जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने इस कार्य को किसी भी राजनीतिक मकसद से जोड़ने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी सामाजिक जिम्मेदारी है, न कि कोई चुनावी रणनीति। पिछले तीन वर्षों से मैं गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहा हूं और अपने स्तर से समाधान का प्रयास करता हूं। यह मेरी फितरत है, समाज सेवा।"
लोगों ने भी उनके इस प्रयास को दिल से सराहा है। आम जन का कहना है कि जब शासन-प्रशासन आंखें मूंदे हुए है, तब ई. संजय कुमार ने यह साबित किया है कि सच्चे नेता वही होते हैं जो पद या प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता देते हैं।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जब वे स्वयं एक आम नागरिक की तरह कुर्सी साफ करते हुए दिखे, तो यह दृश्य सिर्फ एक तस्वीर नहीं था, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक मूल्यवान प्रेरणा बन गया। करोड़ों की संपत्ति और सामाजिक पहचान होने के बावजूद उनका यह विनम्र आचरण आज के नेताओं के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
"अगर किसी को भूख होनी चाहिए, तो वह इंसानियत की भूख होनी चाहिए, न कि दिखावे या पद की," ई. संजय कुमार का यह कथन आज उनके कार्यों में जीवंत रूप से परिलक्षित हो रहा है।
बिहार की मिट्टी ने हमेशा से ही मूल्यवान और संस्कारित नेतृत्व को जन्म दिया है। ई. संजय कुमार उसी परंपरा के एक चमकते उदाहरण बनकर उभरे हैं। आज जब समाज को ज़मीन से जुड़े, विनम्र और सेवा भाव से प्रेरित नेताओं की ज़रूरत है, तब संजय कुमार सिंह जैसे व्यक्तित्व आशा की एक नई किरण लेकर आए हैं।
जनता का कहना है कि ऐसे नेता ही जन सुराज की सोच को धरातल पर उतार सकते हैं और "जनता का राज" स्थापित कर सकते हैं। यह कार्य महज पानी पहुंचाने का नहीं, बल्कि जन सेवा की सच्ची भावना को पुनः जाग्रत करने का भी है।
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