रक्सौल : भाई-बहन ने रचा अनोखा इतिहास, रक्षा बंधन पर दिया समाज को भाईचारे का संदेश

अमरुल आलम की रिपोर्ट रक्सौल (पू.च.): रक्सौल की धरती अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों के लिए जानी जाती रही है। इस बार रक्षा बंधन के मौके पर यहां के दो भाई-बहनों ने ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने न केवल रिश्तों की मिठास को और गहरा किया, बल्कि पूरे समाज को आपसी प्रेम और एकता......

Aug 10, 2025 - 11:45
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रक्सौल : भाई-बहन ने रचा अनोखा इतिहास, रक्षा बंधन पर दिया समाज को भाईचारे का संदेश

अमरुल आलम की रिपोर्ट
रक्सौल (पू.च.): रक्सौल की धरती अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों के लिए जानी जाती रही है। इस बार रक्षा बंधन के मौके पर यहां के दो भाई-बहनों ने ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने न केवल रिश्तों की मिठास को और गहरा किया, बल्कि पूरे समाज को आपसी प्रेम और एकता का प्रेरक संदेश दिया।

समसुद्दीन आलम और उनकी बहन अंजली कुमारी उर्फ इंदु सोनी, जिन्हें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सम्मानित कर चुके हैं,  का रिश्ता बचपन से ही अटूट और गहरा रहा है। अलग-अलग पेशे और जिम्मेदारियों में होने के बावजूद दोनों हमेशा एक-दूसरे के संबल बने रहे हैं।

समसुद्दीन आलम बचपन की यादें ताजा करते हुए भावुक हो उठते हैं। वे बताते हैं, "दीदी बचपन से ही मेरा ख्याल रखती थीं। गलती करने पर भी हमेशा बचा लेती थीं। दीदी की शादी का दिन मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल और भावुक दिन था, जब हम दोनों भाई-बहन सबसे ज्यादा रोए थे।"

वहीं, इंदु सोनी भी अपने भाई के प्रति गहरी भावनाएं व्यक्त करती हैं। मुस्कुराते हुए कहती हैं, "समसुद्दीन बचपन से ही नटखट रहा है। मैंने हमेशा इसे बचाने और संवारने का काम किया है। देखते-देखते 30 साल बीत गए, लेकिन आज भी यह मुझे वैसा ही लगता है, जैसे यह 5 साल का छोटा समसुद्दीन हो, जिसे मैं कह रही हूं,  ‘ये मत कर, वो मत कर।’"

पारिवारिक रिश्ते से इतर, इंदु सोनी का समाज के प्रति दृष्टिकोण भी प्रेरणादायक है। उनका मानना है कि हर समाज में कुछ लोग मतभेद और लड़ाई बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें या तो ऐसे लोगों को समझाना चाहिए या फिर सबको एकजुट कर एक बेहतर समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

इस रक्षा बंधन पर राखी और मिठाई से आगे बढ़कर, इन भाई-बहनों ने समाज को प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश दिया। रक्सौल के इस प्रेरणादायक उदाहरण ने साबित कर दिया कि अगर हम अपने निजी रिश्तों में अपनापन और जिम्मेदारी निभा सकते हैं, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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