सिकरहना: दहेज के लिए 22 वर्षीय नवविवाहिता की हत्या, शव जलाने की कोशिश में रंगे हाथों पकड़े गए ससुराल पक्ष के लोग

चम्पारण टुडे /सिकरहना /पूर्वी चम्पारण।  पूर्वी चंपारण ज़िले में दहेज प्रथा की एक और वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ महज़ 22 वर्षीय नवविवाहिता की दहेज के लिए हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने.......

Jul 10, 2025 - 21:35
Jul 10, 2025 - 20:55
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सिकरहना: दहेज के लिए 22 वर्षीय नवविवाहिता की हत्या, शव जलाने की कोशिश में रंगे हाथों पकड़े गए ससुराल पक्ष के लोग
File Photo

चम्पारण टुडे /सिकरहना /पूर्वी चम्पारण। 
पूर्वी चंपारण ज़िले में दहेज प्रथा की एक और वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ महज़ 22 वर्षीय नवविवाहिता की दहेज के लिए हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के प्रयास में उसका शव जलाया जा रहा था। यह सनसनीखेज मामला घोड़ासहन थाना क्षेत्र के कसवा कदमवा गांव का है।

जानकारी के अनुसार, ढाका थाना क्षेत्र के रक्सा रहीमपुर निवासी राजू कुमार ने अपनी बहन सुगन्धि कुमारी (उम्र 22 वर्ष) की दहेज हत्या के आरोप में ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ घोड़ासहन थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।

राजू कुमार ने आवेदन में बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व हिंदू रीति-रिवाज से सुगन्धि की शादी कसवा कदमवा निवासी नितेश साह से की गई थी। शादी के कुछ ही समय बाद से सुगन्धि को दहेज को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था।

अंतिम बार बहन ने दी थी फोन पर मारपीट की सूचना :
राजू ने बताया कि 9 जुलाई की रात को उसकी बहन ने फोन पर जानकारी दी कि ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई है। रात अधिक होने के कारण वे लोग तत्काल नहीं पहुँच सके।

10 जुलाई को जलाया जा रहा था शव :
जब 10 जुलाई की सुबह राजू अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के साथ बहन के ससुराल पहुँचा तो वहाँ गाँव के लोगों से जानकारी मिली कि सुगन्धि का शव जलाया जा रहा है। जब वे लोग घटनास्थल पर पहुँचे तो देखा कि शव लगभग पूरी तरह जल चुका था और ससुराल पक्ष के लोग वहाँ से निकल गए। इस घटना से पूरे इलाके में आक्रोश और मातम का माहौल है।

थाना अध्यक्ष ने क्या कहा? :
घोड़ासहन थानाध्यक्ष ने पुष्टि करते हुए बताया कि आवेदन प्राप्त हुआ है और मामले की जाँच प्रारंभ कर दी गई है। पुलिस की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

समाज में फिर उठे सवाल :
इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कब तक बेटियाँ दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी? कानून और समाज को मिलकर ऐसे मामलों पर सख्त रुख अपनाने की ज़रूरत है।

रिपोर्ट : चम्पारण टुडे, पूर्वी चंपारण ब्यूरो

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