मास्क पहनना अब और जरूरी हो जाएगा ।
श्रवण कुमार ।
क्या कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फ़ेस मास्क पहनना चाहिए?
इस सवाल का जवाब अब विश्व स्वास्थ संगठन के कुछ विशेषज्ञ ढूंढेंगे.
विशेषज्ञों का यह समूह अब ये जानने के लिए शोध करेगा कि क्या कोरोना वायरस छींक के ज़रिए 6-8 मीटर से भी ज़्यादा दूरी तक जा सकता है?
अमरीका में हुए एक अध्ययन का कहना है कि कोविड-19 वायरस छींक के ज़रिए 6-8 मीटर की दूरी तक जा सकता है.
इस समूह की अगुवाई करने वाले प्रोफ़ेसर डेविड हेमैन ने कहा कि नई रिसर्च से मास्क पहनने के निर्देशों और सलाह में बदलाव आ सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व निदेशक प्रोफ़ेसर हेमैन ने कहा, "नए साक्ष्यों को देखते हुए हम एक बार फिर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें मास्क पहनने के तरीकों में बदलाव करने की ज़रूरत है या नहीं."
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ संक्रमण के ख़तरे को रोकने के लिए खांसने या छींकने वाले व्यक्ति से एक मीटर की दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
डब्ल्यूएचओ बीमार या कोरोना संक्रमण के लक्षणों वाले व्यक्तियों को मास्क पहनने की सलाह देता है.
फ़िलहाल डब्ल्यूएचओ उन्हीं लोगों को मास्क पहनने की सलाह देता है जिन्हें या तो संक्रमण की आशंका हो या वो संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हों ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर भी ज़ोर देता है कि मास्क पहनने का फ़ायदा तभी होगा जब इन्हें थोड़े समय में बदला जाए, ठीक से डिस्पोज़ किया जाए और बार-बार हाथ धोया जाए।
ब्रिटेन और अमरीका समेत कई देश सोशल लोगों को डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने और एक-दूसरे से कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखने को कह रहे हैं,
ये सलाह उन साक्ष्यों पर आधारित है जिनमें पाया गया है कि कोरोना वायरस नाक और मुंह के ज़रिए बाहर आने वाली बूंदों के ज़रिए फैलता है ।
ऐसा माना जाता है कि संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुंह से निकलने वाली ज़्यादातर बूंदें या तो वाष्प बनकर उड़ जाती हैं या ज़मीन पर गिर जाती हैं.
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