मुजफ्फरपुर की पहचान और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रस्तावित ‘लीचीपुरम बोर्ड’, प्रशासन को सौंपा प्रस्ताव
मुजफ्फरपुर। लीची के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले मुजफ्फरपुर में लीची के पेड़ों के संरक्षण, पर्यावरण बचाने और लीची आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ‘लीचीपुरम बोर्ड’ के गठन का प्रस्ताव सामने आया है। यह प्रस्ताव लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के संस्थापक एवं पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव और नगर विधायक रंजन कुमार को सौंपा।

प्रस्ताव में मुजफ्फरपुर की सरकारी इमारतों और सार्वजनिक परिसरों में लीची से जुड़ी स्थानीय कला, संस्कृति, पर्यावरण और विरासत को प्रदर्शित करने के साथ शहर की विशिष्ट पहचान को और मजबूत करने की पहल का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही लीची के पेड़ों के संरक्षण और लीची आधारित उद्योग-धंधों तथा स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने को भी प्रस्ताव का हिस्सा बनाया गया है।
अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता ने कहा कि मुजफ्फरपुर के लिए लीची महज एक फल नहीं है, बल्कि यहां की मिट्टी, पर्यावरण, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय पहचान से जुड़ी विरासत है। उनके मुताबिक लीची के संरक्षण को शहर के समग्र विकास और स्थानीय गौरव से जोड़ने की जरूरत है।प्रस्ताव पर अधिकारियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई। पदाधिकारियों ने पहल की सराहना करते हुए इसे सरकार के समक्ष अनुशंसा के रूप में भेजने की बात कही। अधिकारियों के अनुसार लीची के पेड़ों के संरक्षण के साथ लीची आधारित उद्योग, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल उपयोगी हो सकती है।

अभियान की परिकल्पना ‘लीचीपुरम : एक अनहद सृजन’ के रूप में की गई है। इसके तहत मुजफ्फरपुर को ऐसी विशिष्ट पहचान देने की कल्पना है कि शहर में प्रवेश करते ही लोगों को इसकी लीची संस्कृति और विरासत का अहसास हो।
अभियान के प्रस्तावित संदेश के तौर पर “यह लीची का मीठा शहर है… यह लीचीपुरम है” स्लोगन को शहर में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने का सुझाव भी दिया गया है।
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