समस्तीपुर में बाढ़ से 2.33 लाख लोग प्रभावित, 121 सामुदायिक रसोई और 227 नावें राहत कार्य में जुटीं
समस्तीपुर। जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 2 लाख 33 हजार 212 लोगों के प्रभावित होने के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, राहत सामग्री और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के साथ पशुओं के लिए भी चारा, आश्रय और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिलहाल 121 कम्युनिटी किचन संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक 4 लाख 22 हजार 591 मील परोसे जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि सामुदायिक रसोई में भोजन की गुणवत्ता और नियमित संचालन की निगरानी की जा रही है।
बारिश और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवासीय जरूरतों में मदद के लिए अब तक 36,800 पॉलिथीन शीट वितरित की गई हैं। जरूरत के मुताबिक अन्य राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
22 मेडिकल कैंपों में स्वास्थ्य सेवाएं
बाढ़ प्रभावित आबादी को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 22 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इन कैंपों में स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
पशुओं के लिए 17 राहत कैंप, 1,044 क्विंटल चारा
बाढ़ के दौरान पशुधन की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने इंतजाम किए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 17 पशु राहत कैंप/शेड बनाए गए हैं। पशुपालकों के पशुओं के लिए अब तक 1,044 क्विंटल पशु चारा/भूसा उपलब्ध कराया गया है।
इसके अलावा 17 पशु चिकित्सा कैंप संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक इन कैंपों में अब तक 2,531 पशुओं का उपचार किया जा चुका है।
राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 227 नावें
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए तीनों प्रभावित प्रखंडों में 227 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल प्रभावित लोगों के आवागमन के साथ जरूरतमंद इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी किया जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। संबंधित पदाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने तथा जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन का दावा है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुंचाने और लोगों तथा पशुओं के लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षित आवागमन एवं आश्रय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है।
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