मोतिहारी : मानव तस्करी और बाल श्रम पर सख्ती, सीमा से लेकर रेलवे स्टेशन तक 24 घंटे निगरानी के निर्देश

पूर्वी चंपारण में मानव तस्करी और बाल श्रम पर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भारत-नेपाल सीमा, रक्सौल बॉर्डर, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर 24 घंटे निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। AHTU, SSB, RPF, GRP और स्थानीय पुलिस को बेहतर समन्वय से काम करने को कहा गया। होटल, ढाबे, ईंट-भट्ठों और फैक्ट्रियों में बाल श्रम के खिलाफ नियमित छापेमारी तथा दोषियों पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। रेस्क्यू किए गए बच्चों के उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास के साथ बाल गृहों में सुरक्षा, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

Sep 17, 2026 - 18:16
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मोतिहारी : मानव तस्करी और बाल श्रम पर सख्ती, सीमा से लेकर रेलवे स्टेशन तक 24 घंटे निगरानी के निर्देश

चम्पारण टुडे /मोतिहारी /पूर्वी चम्पारण 
पूर्वी चंपारण। पूर्वी चंपारण समाहरणालय स्थित एनआईसी में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव व्यापार निवारण)’ एवं ‘जिला बाल संरक्षण समिति’ की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में मानव तस्करी और बाल श्रम पर प्रभावी रोक लगाने के साथ-साथ बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास तथा तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए गए।

भारत-नेपाल सीमा सहित संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे निगरानी :-
भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण पूर्वी चंपारण को मानव तस्करी की दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए रक्सौल बॉर्डर, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), सशस्त्र सीमा बल (SSB), रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी (GRP) और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर चौबीसों घंटे सतर्कता बरतने को कहा।

बाल श्रम कराने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई :-
बैठक में होटल, ढाबे, ईंट-भट्ठे, छोटी फैक्ट्रियों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल श्रम की रोकथाम के लिए नियमित छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। बाल श्रम अथवा मानव तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया।

रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास पर जोर :-
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को बिना विलंब चिकित्सकीय सुविधा, मनो-सामाजिक काउंसलिंग और सुरक्षित पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही चाइल्ड हेल्प डेस्क एवं चाइल्ड हेल्पलाइन को पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

बाल गृहों की व्यवस्थाओं की भी हुई समीक्षा :-
बैठक के दौरान सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई के अधीन संचालित बाल गृहों की सुरक्षा, आवास, भोजन एवं शिक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। सभी बाल गृहों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं सुनिश्चित करने तथा बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया गया।

बच्चों का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं :-
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि “मानव तस्करी और बाल श्रम गंभीर एवं अक्षम्य अपराध है। किसी भी सूरत में बच्चों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद :-
बैठक में डीएसपी मुख्यालय, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के अधिकारी, एसएसबी एवं रेलवे (RPF/GRP) के प्रतिनिधि, बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य, श्रम विभाग के पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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