खाद्यान को कालाबाजारी में बेचकर पीडीएस दुकानदार हो रहे मालामाल
नरेन्द्र झा/दिनेश चिरैया।
सरकार की लचर व्यवस्था व विभाग की निगरानी में विगत पांच वर्षों से करीब एक सौ गरीबों के निवाले को गटक रहे है पीडीएस दुकानदार। अब तक लाखों रुपये के खाद्यान्न को कालाबाजार में बेच कर पीडीएस दुकानदार हो गये है मालामाल। मामला प्रखण्ड अन्तर्गत सिरौना पंचायत का है। मामले को लेकर समाजसेवी चंचल श्रीवास्तव ने सिकरहना एसडीएम व डीएम सहित खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव तथा मुख्यमंत्री को आवेदन पत्र दिया है।
जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2016 में विभागीय अधिकारियों के इशारे पर पंचायत के पीडीएस दुकानदारों ने करीब एक सौ लाभुकों को विश्वास में लेकर उनका राशनकार्ड अपने पास रख लिया। एक दो बार उन्हें खाद्यान्न व केरोसिन की आपूर्ति की गयी। बाद कह दिया गया कि आपका राशनकार्ड कैंसिल हो गया है। इसके बाद से सभी लाभुक प्रखण्ड से जिला तक का चक्कर काटते रहे। लेकिन इन गरीबों की कोई नही सुना। ये भूख से बिलबिलाते रहे और पीडीएस दुकानदार इनके निवाले को कालाबाजार में बेच बन्दरबांट करते रहे। इधर राशनकार्ड को आधार से जोड़े जाने के बाद मामले का खुलासा हुआ है। तब लाभुकों को इस वृहत घोटाले की जानकारी हुई है।
अब वे लोग पांच वर्षों का खाद्यान्न लेने पर अड़े हुए है। जबकि इन पीडीएस दुकानदारों का सिंडिकेटर चालू माह का खाद्यान्न देकर मामले का वारा न्यारा करना चाह रहे है। समाजसेवी चंचल श्रीवास्तव सहित लाभुकों ने बताया कि लॉक डाउन में खाद्यान्न के अभाव में वे लोग भुखमरी की पीड़ा झेल रहे हैं। यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा अविलंब मामले की जांच कर उनका अधिकार नही दिलाया गया तो वे लोग लॉक डाउन को धता बताते हुए प्रखण्ड कार्यालय का घेराव करेंगे।
इस बावत कोई भी अधिकारी कुछ बोलने से परहेज कर रहे है। वही एम ओ राजीव कुमार का कहना है कि यदि यह मामला सच है तो जांच कर कार्रवाई की जायेगी।
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