सीतामढ़ी :- होली में अपने घर पहुंचे परदेसियों ने बयां की अपनी ट्रेन सफर की व्यथा

Mar 2, 2026 - 16:00
Mar 2, 2026 - 18:53
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सीतामढ़ी :- होली में अपने घर पहुंचे परदेसियों ने बयां की अपनी ट्रेन सफर की व्यथा

-- होली को लेकर रेल द्वारा अपने होम स्टेशन पहुंचे यात्रियों ने बयां की अपनी सफर की व्यथा

सागर कुमार, चम्पारण टुडे सीतामढ़ी ब्यूरो 

सीतामढ़ी :- भाईचारा के साथ रंग और गुलाल का पर्व होली को लेकर परदेसियों का अपने घर आगमन शुरू हो गया है। पर्व से उत्साहित यात्रियों में यात्रा की दौरान होने वाली परेशानियों की दर्द नहीं दिख रही थी। साथ ही अपने होम स्टेशन उतरने की उत्साह चेहरे पर झलक रही थी। यात्रा के दौरान अपने परिवार के सदस्यों के साथ ट्रेन से पहुंचे बच्चे ज्यादा उत्साहित लग रहे थे। कई बच्चे अपने हाथों में रंग और गुलाल उड़ाने वाली प्लास्टिक की ऑटोमेटिक फ़िचकारी का बंद डब्बा लिए उत्साह पूर्वक स्टेशन से निकल रहे थे।

इस दौरान दैनिक जागरण सीतामढ़ी टिम द्वारा कई यात्रियों को प्लेटफार्म पर रोक कर यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों के लिए पूछे जाने पर चेरलापल्ली हैदराबाद से पहुंचे यात्रियों में सुरसंड भिट्ठा निवासी सुरेश दास, ज्योति झा, परिहार निवासी सुरेंद्र कुमार, बबिता देवी, रीना कुमारी इत्यादि यात्रियों ने बताया कि हम लोग पूर्व में ही इस ट्रेन की टिकट ले चुके थे, सीट तो मिल गई लेकिन भीड़ की परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि सिकंदरा बाद से यह ट्रेन मात्र 25 मिनट देरी से पहुंची, जो रस्ते में कभी तीन घंटा तो कभी पांच घंटा देरी से चली है, लेकिन सीतामढ़ी यह ट्रेन अपने नियत समय से 03 घंटा 15 मिनट की देरी से पहुंची है। यात्रियों ने बताया कि भीड़ इतनी रही कि स्लीपर क्लास और जेनरल क्लास में यात्रियों को वास रूम पहुंचने में काफी मस्कत करनी पर रही थी। खासकर महिला और बुजुर्ग यात्रियों की परेशानी ज्यादा थी। उन्होंने बताया कि गाड़ी जब बरौनी स्टेशन पहुंची तो थोड़ी भीड़ से राहत मिली उसके बाद धीरे धीरे गाड़ियो से यात्री विभिन्न स्टेशनों पर उतरते रहे। इतना चिल्म पचिल्ली के बाद अपने होम स्टेशन सीतामढ़ी ट्रेन से उतरा हूं, बड़ी राहत के साथ खुशी महसूस कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि भीड़ के कारण ट्रेन के अंदर वास रूम की स्थिति खराब थी। यात्रियों ने बताया कि गुणवत्ता और व्यवस्था के नाम पर रेलवे जितनी बहवाही बटोरती है, ऐसा धरातल पर नहीं दिखती है। ट्रेन में पानी खत्म होने पर वास रूम जाने वाले यात्रियों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती थी। पानी नहीं होने के कारण यात्री ट्रेन 20 रुपए बोतल पानी खरीद कर वास रूम जाते थे। वास रूम से वापस आकर हाथ पैर धोने के लिए यात्री अगले स्टेशन गाड़ी पहुंचने का इंतजार करते थे। खाने पीने की सामान बेचने वाले द्वारा लुट मची थी। यात्री वेंडरों का विरोध से समझौता कर अपनी यात्रा कर रहे थें। मिला जुला कर यात्रा जितनी दर्दनीय थी, अपने होम स्टेशन सीतामढ़ी पहुंच कर काफी खुशी महसूस कर रहे हैं।

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