सुगौली: सिकरहना नदी के उफान से सुगौली में बाढ़ का संकट गहराया

अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखंड से गुजरने वाली सिकरहना नदी इन दिनों अपने उफान पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से नगर क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर गया है। धूमनी टोला बांध की मरम्मत लंबे समय से नहीं होने के कारण सरेही इ......

Oct 6, 2025 - 16:03
Oct 6, 2025 - 19:28
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सुगौली: सिकरहना नदी के उफान से सुगौली में बाढ़ का संकट गहराया
सुगौली: सिकरहना नदी के उफान से सुगौली में बाढ़ का संकट गहराया

अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखंड से गुजरने वाली सिकरहना नदी इन दिनों अपने उफान पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से नगर क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर गया है। धूमनी टोला बांध की मरम्मत लंबे समय से नहीं होने के कारण सरेही इलाके में पानी का स्तर बढ़ गया है। इस जलभराव ने खेतों में लगी धान की फसल को पूरी तरह डुबो दिया है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे वे गहरे संकट में हैं।

सिकरहना नदी से सटे सुकुल पाकड़ पंचायत के लाल परसा,धूमनी टोला, चिलझपटी सहित अन्य जगहों सरेही इलाके में चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। वहीं नगर के अमीर खां टोला और गोदाम के आसपास निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। कई घरों में दो-दो फीट तक पानी भर जाने के कारण लोग अपना घर छोड़कर धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर पलायन कर रहे हैं।

वहीं लोगों ने प्रशासन ने गुहार लगाते हुए मुआवजे की मांग कर रहें है। साथ ही नगर के वार्ड संख्या 1, 2, 3, 7, 11, 12, 13 और 18 के कई हिस्सों में सड़कों पर पानी बह रहा है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशुनपुरवा वार्ड नंबर 1 के मोजाहिर मिस्त्री, बद्री शर्मा, चंद्रिका ठाकुर और बलिराम शर्मा सहित कई लोगों ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से नगर के अधिकांश हिस्सों में जल-जमाव की स्थिति बन गई है।

रात के समय पानी के बढ़ते स्तर ने लोगों की नींद उड़ा दी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द राहत और बचाव कार्य शुरू किए जाएं ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को इस संकट से राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बांधों की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था की जाती, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। अब प्रशासन की सक्रियता ही लोगों की उम्मीद का एकमात्र सहारा बची है।

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