सुगौली: शिक्षा की नई इबारत लिख रहे हैं,प्रधानाध्यापक मो. सैदुल्लाह अंसारी
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखण्ड क्षेत्र के यूएमएस नकरदेई उर्दू के प्रधानाध्यापक सह बिहार स्टेट टीचर्स एसोसियेशन के वरीय जिला सचिव मो. सैदुल्लाह अंसारी शिक्षा जगत में नई ऊँचाइयाँ स्थापित कर रहे हैं। कठिन परिश्रम और समर्पण से वे नकरदेई जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को संवारे में जुटे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में उन्होंने विद्यालय का व्हाट्सएप ग्रुप बना कर ........
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखण्ड क्षेत्र के यूएमएस नकरदेई उर्दू के प्रधानाध्यापक सह बिहार स्टेट टीचर्स एसोसियेशन के वरीय जिला सचिव मो. सैदुल्लाह अंसारी शिक्षा जगत में नई ऊँचाइयाँ स्थापित कर रहे हैं। कठिन परिश्रम और समर्पण से वे नकरदेई जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को संवारे में जुटे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में उन्होंने विद्यालय का व्हाट्सएप ग्रुप बना कर अभिभावकों,शिक्षकों और छात्रों को जोड़ा और समय-समय पर सभी को नवाचार आधारित शैक्षणिक गतिविधियों से अवगत कराते हुए शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई। नामांकन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पोस्टर अभियान, लाउडस्पीकर रैली, जनसंपर्क कार्यक्रम चलाकर पोषक क्षेत्र में शत-प्रतिशत नामांकन पूर्ण किया। व्यस्तता के बावजूद प्रतिदिन वे स्वयं दो से तीन घंटी पढ़ाते हैं और बच्चों का गृहकार्य जाँचकर गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करते हैं। साथ ही बच्चों में हुनर निखारने के लिए खेल, रंगोली,पेंटिंग,भाषण व वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं। साप्ताहिक व मासिक परीक्षा लेकर उत्तीर्ण छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए सांत्वना पुरस्कार भी देते हैं। चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों पर विशेष बल देते हुए चेतना सत्र में बच्चों को अनुशासन, मानवता, समाजिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से अवगत कराया जाता है,जिससे वे एक आदर्श भारतीय नागरिक बन सकें। उनके उत्कृष्ट कार्य को लेकर उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। जीर्ण-शीर्ण और अव्यवस्थित विद्यालय को उन्होंने सुसज्जित कर एक आदर्श विद्यालय का स्वरूप दिया है,जिसकी सराहना अभिभावक,ग्रामीण और जनप्रतिनिधि लगातार करते रहते हैं। इस शिक्षा क्रांति में प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी रामविजय यादव, बीआरसी कर्मियों तथा विद्यालय के शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। यूं कहा जा सकता है कि मो. सैदुल्लाह अंसारी आज ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
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