सीतामढ़ी :- सरकार के सेटेलाइट सीतापुरम प्रोजेक्ट वापस लेने की हुंकार उठी, गांव-गांव से संघर्ष की तैयारी का लिया गया संकल्प

Sep 02, 2026 - 21:23
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सीतामढ़ी :- सरकार के सेटेलाइट सीतापुरम प्रोजेक्ट वापस लेने की हुंकार उठी, गांव-गांव से संघर्ष की तैयारी का लिया गया संकल्प
सीतामढ़ी :- सरकार के सेटेलाइट सीतापुरम प्रोजेक्ट वापस लेने की हुंकार उठी, गांव-गांव से संघर्ष की तैयारी का लिया गया संकल्प
सीतामढ़ी :- सरकार के सेटेलाइट सीतापुरम प्रोजेक्ट वापस लेने की हुंकार उठी, गांव-गांव से संघर्ष की तैयारी का लिया गया संकल्प

-- लैंड पुलिंग में55%भी नही डेवलपर के नक्शे से 33%भूमि पर हीं किसान कर सकेंगे निर्माण।

-- सेटेलाईट सीटी अडानी के लिए किसानों की मुफ्त जमीन लूट योजना।

-- सीतामढी को सूखाग्रस्त जिला घोषित करे सरकार।

-- गन्ना का 750/-रू से कम दाम किसानों को मंजूर नही।

सागर कुमार, चंपारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,,

सीतामढ़ी :- पेंशनर समाज के सभागार में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा,उतर बिहार के 26वें स्थापना दिवस पर किसानों ने एक स्वर से प्रस्ताव किया कि सरकार सेटेलाइट सीतापुरम प्रोजेक्ट वापस ले,सभी कृषि उपज का सीटू+50 प्रतिशत दाम दिया जाए,नदी जलप्रबंधन हो, प्राकृतिक आपदा से खेती की सुरक्षा,तथा गन्ना मूल्य 750/- रू क्विंटल घोषित करने के सवाल पर पंचायत से पटना तक संघर्ष तेज करेंगे तथा नवम्बर में पटना में मुख्यमंत्री आवास के घेराव तथा प्रदर्शन में मजबूत भागीदारी की जायगी। इसके लिए सेटेलाईट सीतापुरम प्रोजेक्ट के लिए अधिसूचित सभी गांवों में महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया गया। मौके पर महापंचायत की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष जलंधर यदुबंशी ने की।

प्रो आनन्द किशोर ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा सेटेलाईट सीतापुरम सीटी के नाम पर जमीन का दाम बढने तथा जमीन को विकसित करने का भ्रम फैलाकर सरकार जमीन के संवैधानिक अधिकारों तथा भारत सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून-2013 को दरकिनार करते हुए सीतापुरम प्रोजेक्ट लाने का सत्य यही है कि सरकार को अडानी को मुफ्त में जमीन देना है। सरकार लैंड लौक कर लैंड पुलिंग के माध्यम (भूमि अधिग्रहण कर नही) से मुफ्त में किसानों का 45 प्रतिशत जमीन छीनेगी और पूंजीपति मित्रों द्वारा चयनित मुख्य क्षेत्र के अलावे किसानों को अन्यत्र 55 प्रतिशत जमीन देगी। दिये गये 55 प्रतिशत जमीन में भी पूंजीपतियों का कानून चलेगा?दिये गये55 प्रतिशत जमीन में भी दिये गये नक्शे के हिसाब से 60 प्रतिशत क्षेत्र में यानि कुल भूमि के 33 प्रतिशत भाग में हीं निर्माण हो सकेगा। डेवलपर की मर्जी से नियमों में बदलाव भी होगा और किसानों को अपनी जमीन औने-पौने दाम में छोडना भी पडेगा।इसके अलावे गांवों का भी विस्थापन होगा।सीतामढी में बागमती परियोजना में विस्थापित 96गांवों में दर्जनों गांव आज तक नही बस सके है जो बसे भी हैं उनमें भारी अनियमितता है।

प्रो श्री किशोर ने कहा गन्ना का उत्पादन लागत 750रू क्विंटल आता है। उससे कम मूल्य किसानों को मंजूर नही है।उन्होने गन्नाके बकाये 50करोड रू भुगतान पर केन एक्ट के अनुसार 15 प्रतिशत ब्याज भुगतान की सरकार से मांग की है। डा श्री किशोर ने चीनी मिल प्रबंधन द्वारा साजिश कर कराये गये केसीसी से किसानों को मुक्ति दिलाने की सरकार से मांग की।

मौके पर जिलाध्यक्ष जलंधर यदुबंशी ने जिले में व्याप्त सूखा तथा हर वर्ष की प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि सीतामढी को सूखाग्रस्त जिला घोषित करते हुए किसानों को फसल क्षति पर बीमा तथा अगली खेती हेतू नकद सहायता दिया जाए।

पेंशनर समाज के अध्यक्ष राम एकबाल साह ने आगत किसान प्रतिनिधियों का स्वागत किया । महापंचायत को भूमि बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक बैधनाथ हाथी ने संबोधित करते हुए कहा कि सेटेलाइट प्रोजेक्ट के खिलाफ गांव-गांव से बडी लडाई की तैयारी करनी है। मोर्चा नेता रामसागर ठाकुर, जितेन्द्र हाथी अमरेन्द्र राय, जीवनाथ शाफी, संजय कुमार, शशिधर शर्मा, अवधेश यादव, राम प्रमोद मिश्र, शंकर मंडल,नन्द किशोर मंडल,राम सुरेश तिवारी, मो.अली अकबर, उमेश कुमार सिंह, पारसनाथ सिंह, बिजेन्द्र नाथ राजू , सत्यम कुमार सिंह,उपेन्द्र आर्य,राम पुकार साह,धीरज कुमार, रबीन्द्र सिंह, प्रभाकर कुमार सिंह, सत्येन्द्र कुमार, रामकलेबर राय, श्याम बिहारी पंडित, अशोक कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, अंगद कुमार, हंसलाल यादव, सुधीर कुमार, नन्द लाल विद्रोही, नागेन्द्र राय, मदन मोहन ठाकुर, महेश कुमार, ओमप्रकाश यादव सहित अन्य किसान नेताओं ने अपना विचार व्यक्त करते हुए गांव-गांव से संघर्ष की तैयारी का संकल्प व्यक्त किया।

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