घोड़ासहन: राजू मुखिया के विकास की रणनीति बनाम सलाम के विरोधी सवाल की लड़ाई में पिछड़ता जनहित, कोर्ट के आदेश के बावजूद शहर के बीचोबीच अवस्थित पोखर का अब तक नहीं हो सका जीर्णोद्धार
चम्पारण टुडे /घोड़ासहन /पूर्वी चम्पारण। घोड़ासहन शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक पोखर, जो कि कभी जल जीवन हरियाली का प्रतीक हुआ करता था, आज अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। डाकघर के समीप स्थित यह पोखर वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। न तो इसका जीर्णोद्धार हो पा रहा है और न ही सौंदर्यीकरण का.......
चम्पारण टुडे /घोड़ासहन /पूर्वी चम्पारण।
घोड़ासहन शहर के बीचोंबीच स्थित ऐतिहासिक पोखर, जो कि कभी जल जीवन हरियाली का प्रतीक हुआ करता था, आज अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। डाकघर के समीप स्थित यह पोखर वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। न तो इसका जीर्णोद्धार हो पा रहा है और न ही सौंदर्यीकरण का कार्य आगे बढ़ पा रहा है। आज के दिन यह पोखर धीरे धीरे कूड़े का ढेर बनते जा रहा है।
करीब एक दशक पूर्व, इस पोखर पर जिला परिषद द्वारा व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्माण की योजना बनाई गई थी। लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा इसपर आपत्ति जताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पोखर के स्वरूप में बदलाव किए बिना उसके सौंदर्यीकरण का निर्देश दिया था।
मुखिया बोले, हर प्रयास को किया जाता है बाधित:
ग्राम पंचायत घोड़ासहन दक्षिणी के मुखिया राजू जायसवाल ने बताया कि प्रशासन और पंचायत द्वारा समय-समय पर पोखर के विकास के लिए पहल की जाती है, लेकिन हर बार कुछ लोग आपत्ति दर्ज कर कार्य को रोकवा देते हैं। कोर्ट के आदेशों के अनुसार जब भी कोई पहल होती है, तो कुछ लोग गैर जरूरी आपत्तियाँ लगाकर योजना को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
लोगो की राय, कोर्ट के आदेशानुसार हो कार्य:
दूसरी ओर, मास्टर सलाम व कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्य कराया जाए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि इस जलस्रोत का सौंदर्यीकरण और संरक्षण न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि इस प्रचंड गर्मी में स्थानीय जल स्तर को बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगा।
विकास बनाम विरोध की लड़ाई में पिछड़ता जनहित:
जहाँ एक ओर राज्य सरकार जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियानों के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं घोड़ासहन शहर बाजार का यह पोखर सरकारी उपेक्षा और स्थानीय विवादों के चलते उपेक्षित पड़ा है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सभी पक्षों को साथ लेकर इस पोखर का कायाकल्प कर पाता है या फिर यह जलस्रोत कागज़ी योजनाओं और आपत्तियों के भंवर में यूँ ही गुम होकर कूड़े का अम्बार बना रहेगा।
राजू सिंह / चम्पारण टुडे
दिनांक 12 जुलाई 2025
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