पीएम मोदी आज करेंगे मुख्यमंत्रियों से बात, लॉकडाउन पर होगा फैसला

पीएम मोदी आज करेंगे मुख्यमंत्रियों से बात, लॉकडाउन पर होगा फैसला

कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए देश भर में लगाए लॉकडाउन के खत्म होने की तारीख नजदीक आ रही है. वहीं, कोरोना वायरस के मामले देश में लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार को सुबह 10 बजे देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बार फिर बैठक करेंगे. माना जा रहा पीएम मोदी देश के मौजूदा हालात, लॉकडाउन की अवधि को तीसरी बार बढ़ाने और गृहमंत्रालय के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के निर्देशों का पालन करने के संबंध में मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे.


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तीन अहम बिंदुओं पर हो सकती है चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ तीन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे. पीएम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना संक्रमण की स्थिति और नए कंटेनमेंट जोन बनने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर भी चर्चा की जाएगी. प्रधानमंत्री गृह मंत्रालय की 20 अप्रैल के संबंध में जारी की गई गाइडलाइन के पालन को लेकर भी चर्चा करेंगे. इस महत्वपूर्ण बैठक में 3 मई के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की जाएगी.

पीएम मोदी देश के मुख्यमंत्रियों से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने या उससे बाहर निकलने की दिशा में भी बात करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्रियों को अपने राज्यों में किए जा रहे प्रयासों के साथ उन्हें यह भी बताना है कि कोरोना से निपटने के लिए आगे क्या किया जाना चाहिए? हालांकि, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अभी से संकेत देना शुरू कर दिया है कि वे लॉकडाउन को अगले दो सप्ताह तक बढ़ाना चाहते हैं. तेलंगाना के सीएम केसीआर ने तो लॉकडाउन को पहले ही 7 मई तक के लिए बढ़ा दिया है. इसके अलावा बीजेपी शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री के ऊपर निर्णय पर छोड़ रखा है.


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उत्तर प्रदेश योगी आदित्‍यनाथ की सरकार इशारा कर चुकी है कि जब तक किसी भी जिले में संक्रमण रहेगा, तब तक लॉकडाउन खोलना चुनौतीपूर्ण होगा. वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आजतक ई-एजेंडा कार्यक्रम में कहना था कि वर्तमान हालात को देखते हुए लॉकडाउन एक साथ नहीं हटाना चाहिए. चरणबद्ध ढंग से लॉकडाउन हटाया जाना चाहिए. वह चाहते हैं कि केंद्र सरकार लॉकडाउन का अधिकार राज्य सरकारों को दे.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजधानी में व्यावसायिक गतिविधियों को तीन मई से पहले नहीं शुरू करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि तीन मई तक प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया है, उसके बाद केंद्र सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है, उस पर निर्भर करेगा कि इसको हम आगे कैसे ले जाते हैं. केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही दिल्ली सरकार आगे की दिशा तय करेगी. हरियणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी आजतक के ई-एजेंडा कार्यक्रम में कहा था कि पूर्ण लॉकडाउन खोल देने से स्थितियां बिगड़ सकती हैं. राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन अवधि को धीरे-धीरे व चरणबद्ध तरीके से खोलना होगा. मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार पर फैसला छोड़ रखा है.


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लॉकडाउन को लेकर पीएम मोदी पिछली बार की तरह ही कोई अंतिम फैसला एक-दो मई के आसपास देश की स्थिति को देखते हुए करेंगे. वहीं, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश में तेजी से कोरोना के मामले सामने आए हैं. इसके अलावा देश के कई बड़े शहर कोरोना की चपेट में हैं. इसे देखते हुए देश भर में लॉकडाउन को एक साथ खोलना मुश्किल है. ऐसे में लॉकडाउन से बाहर निकलने के लिए राज्यवार और जोन स्तर पर फैसला लेने की चर्चा हो सकती है.

हाल के दिनों में कुछ मुख्यमंत्रियों ने केंद्र से राज्यों को फैसले लेने की आजादी की मांग उठाई है. ऐसे में राज्यों को आधिकारिक रूप से लॉकडाउन को खोलने या बढ़ाने की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद मानी जा रही है. केंद्र सरकार की ओर से हवाई सेवा, रेल सेवा में कुछ शर्तों के साथ जरूर लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है. लॉकडाउन की अवधि बढ़ाकर पाबंदियों में धीरे-धीरे ढील दिए जाने की छूट मिल सकती है.


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दरअसल शनिवार को रिहायशी दुकानों को खोलने का निर्णय जिस तरह राज्य सरकारों पर छोड़ा गया था, उससे यह संकेत है कि केंद्र अब लॉकडाउन की दिशा में फैसला लेने की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से राज्यों को दे सकती है. हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि केंद्र अपनी जिम्मेदारी से बचेगा. जहां जरूरी होगा वहां निर्णय भी लिया जाएगा और निर्देश भी दिया जाएगा. केंद्र सरकार राज्यों से समन्वय बनाकर लॉकडाउन से बाहर निकलने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है.

बता दें कि लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को उनके गृहराज्य छोड़ने के लिए कुछ राज्यों ने केंद्र से विशेष ट्रेन चलाने और मजदूरों को लेकर नीति बनाने की मांग की थी. इस दिशा में भी राज्यों के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से चर्चा कर कोई ठोस कदम उठाने की मांग कर सकते हैं. दो राज्य आपसी समन्वय के साथ प्रवासियों के परिवहन पर फैसला ले सकते हैं, लेकिन यह मानकर चलना चाहिए कि सामान्य रूप से विमान, रेल या बस सेवा फिलहाल चालू नहीं होगी. इसके अलावा हॉटस्पाट और कंटेनमेंट के बफर जोन में किसी तरह की सेवा शुरू करने और छूट देने का फैसला फिलहाल सरकार अभी नहीं लेगी.


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सीएम आर्थिक पैकेज की रख सकते हैं डिमांड

पीएम के साथ बैठक में गैरबीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एक बार फिर अपने-अपने राज्य के लिए आर्थिक पैकेज की मांग कर सकते हैं. कांग्रेस शासित राज्यों के सीएम केंद्र सरकार से कह चुके हैं कि जीएसटी कलेक्शन ठप होने से उनकी आर्थिक हालात चरमरा गई है. यहां तक कि जरूरी चीजों के लिए राशि की कमी हो गयी है. इस मांग को तमाम सीएम आज पीएम के सामने दोहरा सकते हैं.