सीतामढ़ी :- दूध उत्पादन में सीतामढ़ी को मिलेगी नई उड़ान, 18 महीने में तैयार होगा आधुनिक संयंत्र
सागर कुमार, चंपारण टुडे, ,,सीतामढ़ी ब्यूरो,, सीतामढ़ी :- जिले के दूध उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। सीतामढ़ी डेयरी में अब दूध से मिल्क पाउडर तैयार किया जाएगा। इसके लिए 76.60 करोड़ रुपये की लागत से 30 एमटीपीडी क्षमता वाले दुग्ध चूर्ण संयंत्र का निर्माण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट .....
-- 76.60 करोड़ की लागत से सीतामढ़ी डेयरी में बनेगा 30 एमटीपीडी क्षमता का मिल्क पाउडर प्लांट, किसानों को मिलेगा लाभ
सागर कुमार, चंपारण टुडे, ,,सीतामढ़ी ब्यूरो,,
सीतामढ़ी :- जिले के दूध उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। सीतामढ़ी डेयरी में अब दूध से मिल्क पाउडर तैयार किया जाएगा। इसके लिए 76.60 करोड़ रुपये की लागत से 30 एमटीपीडी क्षमता वाले दुग्ध चूर्ण संयंत्र का निर्माण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को राघोपुर-बखरी से परियोजना का शुभारंभ किया। संयंत्र को 18 महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके चालू होने से अतिरिक्त दूध को सुरक्षित रखने के साथ किसानों को उनके दूध का बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है।

यह परियोजना राज्य योजना 2025 - 026 एवं 2026 - 027 के तहत स्थापित की जा रही है। संयंत्र में प्रतिदिन 30 मीट्रिक टन दूध से दुग्ध चूर्ण तैयार करने की क्षमता होगी। इससे सीतामढ़ी डेयरी की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी और जिले में डेयरी कारोबार को विस्तार मिलेगा।
परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में उद्योग एवं खेल मंत्री तथा सीतामढ़ी की प्रभारी मंत्री श्रेयसी सिंह विशिष्ट रूप से मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने की। जिले के सांसद, बिहार विधानमंडल के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
डेयरी एवं मत्स्य विभाग के सचिव सह कंफेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक और तिरहुत दुग्ध संघ के प्रबंध निदेशक फूल कुमार झा ,प्रभारी प्रशासनिक पदाधिकारी संजय कुमार सिंह तथा सीतामढ़ी डेयरी के प्रभारी गौरी शंकर प्रसाद समेत विभागीय अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

अतिरिक्त दूध को सुरक्षित रखने में मिलेगी मदद :-
संयंत्र के शुरू होने के बाद दूध का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उसे मिल्क पाउडर के रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे दूध उत्पादन अधिक होने के समय किसानों को अतिरिक्त दूध की बिक्री में परेशानी कम होगी। दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के कारण बाजार की मांग के अनुसार इसकी आपूर्ति भी की जा सकेगी।
किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार :-
नए संयंत्र से सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। दूध की खरीद और प्रसंस्करण बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिलेगा। इसके साथ ही दूध संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

डेयरी क्षेत्र को मिलेगी नई गति :-
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना सीतामढ़ी में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संयंत्र के चालू होने के बाद जिले में दूध के उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा होने की उम्मीद है।
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