इसलामी शिक्षा जगत के रौशन चराग़ लुक़मान सलफी का निधन।
जामिया इमाम इब्ने तैमिया, चंदन बारा शिक्षण संस्थान के संस्थापक और कुलपति डॉ. मोहम्मद लुक़मान सलफी का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से जामिया इमाम इब्ने तैमिया, चंदन बारा गांव और जिला के शिक्षा जगत में एक शोक पसरा हुआ है। ज्ञात हो कि डॉ. लुक़मान सलफ़ी का जन्म 1913 को ढाका के चंदन बारा गांव में हुई। उनके पिता का नाम मो बरकतुल्लाह था। गरीब परिवार में पले बढ़े लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन ने उन्हें शिक्षा जगत के शिखर तक पहुंचा दिया और उन्हें महान विद्वानों में गिना जाने लगा। दरभंगा के अहमदिया सलफिया से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्ति के बाद वह सऊदी अरब के मदीना विश्व विद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। सऊदी हुकूमत ने उन्हें अपने यहाँ ही शैक्षणिक कार्य के लिए रख लिया। धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व में निखार आता गया और देखते ही देखते पूरी दुनिया में उनकी शोहरत होने लगी। सारी शोहरतों के बावजूद डॉ. लुकमान सलफी ने अपना पैतृक गाँव चंदन बारा को नहीं भूला मुसलमानों के कमज़ोर शिक्षा प्रस्तिथि को देखते हुए अपने पैतृक गाँव में एक इस्लामिक शिक्षण संस्थान की नीव रखी और उनकी मेहनत ने उस शिक्षण संस्थान को भी पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया और आज इस शिक्षण संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले भारत सहित पूरी दुनिया में अपनी शैक्षणिक योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं। मरहूम ने सैकड़ों पुस्तकें लिखी जो बहुत सारे इस्लामी संस्थानों (मदरसा) के पाठ्यक्रम में शामिल है। जिनमें विशेष कर "तैसिरूर्रहमान लि बयानिल कुरान" और "मशअले राह" बहुत प्रचलित हुआ। उनके निधन पर जामिया के डायरेक्टर जनरल अब्दुर रहमान तैमी, मौलाना अरशद मदनी, अबुलकैस मदनी, आसिफ तनवीर तैमि, विधान पार्षद डॉक्टर खालिद अनवर, ढाका के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर सगीर अहमद आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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