सीतामढ़ी :- महिला संवाद के तहत, जिले में 45 हज़ार से अधिक महिलाओं ने की भागीदारी, सरकार से साझा की अपनी आकांक्षाएं
- परसौनी की महिलाओं की भागीदारी रही उल्लेखनीय
सागर कुमार, चम्पारण टुडे (सीतामढ़ी ब्यूरो)
सीतामढ़ी :- जिले के 17 प्रखंडों में पिछले छह दिनों से चल रहे महिला संवाद कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को एक नई पहचान और मंच दिया है। कार्यक्रम के ज़रिए महिलाएं न सिर्फ सरकार की योजनाओं से लाभान्वित होकर अपने अनुभव साझा कर रही हैं, बल्कि वे अपने गाँव और राज्य के विकास को लेकर अपनी आकांक्षाएं और सुझाव भी खुलकर रख रही हैं। अब तक जिले के 231 ग्राम संगठनों में इस कार्यक्रम का सफल आयोजन हो चुका है, जिसमें कुल 45,000 से अधिक महिलाओं ने सहभागिता दर्ज की है। बुधवार को परसौनी प्रखंड के परसौनी खिरोधर पंचायत के उत्साह महिला ग्राम संगठन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में 280 महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने इस पहल की सराहना की और कहा कि यह पहली बार है जब सरकार उनकी बात सुनने के लिए खुद गाँव तक आई है। कार्यक्रम में महिलाएं अपने अनुभव साझा करने के साथ-साथ सरकार को सुझाव भी दे रही हैं, जैसे सामुदायिक भवन का निर्माण, शौचालय की सुविधा, पुस्तकालय एवं खेल मैदान की आवश्यकता, वृद्धा और विधवा पेंशन की राशि में वृद्धि, चापाकल की मांग, गली-नाली का निर्माण, और बिजली दर में कटौती।
नीतियों पर चर्चा, योजनाओं पर सुझाव :-
कार्यक्रम के दौरान महिलाएं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, जीविका समूह, स्वयं सहायता समूह, वृद्धा एवं विधवा पेंशन योजना, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना आदि की जानकारी पा रही हैं। महिला संवाद वाहन के माध्यम से ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति द्वारा महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, सरकार की योजनाओं से संबंधित लीफलेट्स एवं मुख्यमंत्री का संदेश भी महिलाओं के बीच वितरित किया गया।
एक महिला प्रतिभागी ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि सरकार हमारे सुझावों को गंभीरता से सुनेगी। हमें विश्वास है कि सरकार हमारी समस्याओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए नई योजनाएं बनाएगी। महिला संवाद कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें महिलाओं द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और सुझावों को मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप में संधारित किया जा रहा है। यह जानकारी नीति निर्माण में उपयोग की जाएगी, जिससे योजनाएं और अधिक प्रभावशाली व जमीनी हकीकत से जुड़ी बन सकें।
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