सीतामढी :- जिला के आपदापीडित किसानों को सीएम द्वारा न्याय दिलाने की मांग गूंजी
-- साजिस के तहत आपदाग्रस्त किसानों का फसल क्षति रिपोर्ट सरकार को नही भेजने की जांच कराई जाए।
-- छूटे हुए प्रखंडो का फसल क्षति रिपोर्ट भेजने तथा चयनित पंचायतों को आवेदन के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाए।
सागर कुमार, चम्पारण टुडे (सीतामढ़ी ब्यूरो)
सीतामढ़ी :- बिहार के सी एम,कृषि मंत्री तथा कृषि सचिव को मेल भेजते हुए संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक डा.आनन्द किशोर तथा जिलाध्यक्ष जलंधर यदुबंशी ने सीतामढ़ी जिला के वर्षा,बाढ तथा मोंथा तूफान से प्रभावित किसान- मजदूरों को न्याय दिलाने की मांग की है तथा कहा है कि जिले के छूटे हुए पंचायतों को फसल क्षति ईनपुट अनुदान से जोडने तथा पहले से घोषित पंचायतों को आवेदन करने हेतू एक सप्ताह का समय दिया जाए
जिले मे पहले सुखाड फिर अक्टूबर की वर्षा,मोंथा तूफान के बाद नवम्बर तक खेतों में पानी,अभी दिसम्बर में भी हजारों एकड में पानी जिससे रबी खेती भी मारी जायगी।बावजूद फसल क्षति रिपोर्ट सरकार को नही भेजने की साजिश तथा किसानों के जीवन से हुए खिलबाड की जांच कराई जाए।
मेल भेजते हुए किसान नेताओं ने कहा है कि वर्षा,बाढ तथा मोंथा तूफान से संबधित फसल क्षति रिपोर्ट नही भेजे जाने के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में किसानो द्वारा समाहरणालय पर प्रदर्शन तथा घेराव के बाद डी एम की शख्ती से कृषि विभाग द्वारा अधूरा फसल क्षति रिपोर्ट सरकार को भेजा गया।अगर पूर्व में हीं संपूर्ण जिले की फसलक्षति रिपोर्ट भेज दी गई होती तो सरकार के घोषित 12 जिलों की सूची में सीतामढी जिला भी जुड गया होता।
परन्तु यह साजिश हीं कहा जा सकता है कि जिला के 17 प्रखंडों के 273पंचायतों में मात्र 83 पंचायतों की हीं क्षति सूंची सरकार को भेजी गईऔर उसे आनलाईन आवेदन का महज तीन दिन समय दिया गया वह भी आनलाईन पोर्टल पर जिला दिखा नही रहा था जिस कारण से किसानआवेदन नही कर सके।सीतामढी जिला जहां 7-8 लाख किसान परिबार होंगे वहां से महज 2500 आवेदन का आनलाईन होना भी साजिश का हीं हिस्सा लगता है।अगर 83पंचायतों के किसानों को मौका मिलता तो 50-60हजार से अधिक आवेदन गया होता।जैसा कि राज्य के अन्य जिलों से आवेदन गया है।
सीतामढी जिला में जहां अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में हीं 271मिलीमीटर वर्षा हुई थी तथा अंतिम सप्ताह में वर्षा तथा मोंथा तूफान की भीषण त्रासदी हुई फिर भी पीडित किसानों के साथ इतना बडा अन्याय हुआ। सी एम की सरकारी धन पर आपदा प्रभावितों का पहला हक होने की घोषणा झूठी सावित हुई।
जब संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल जिला कृषि पदाधिकारी से मिला तो उसने पल्ला झाड लिया कि प्रखंडो से जो रिपोर्ट आया उसे भेज दिया गया।जिला कृषि पदाधिकारी तथा समाहर्ता की भी जिम्मेदारी थी कि सभी आपदा पीडितों प्रखंडो का रिपोर्ट मंगाकर पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजा जाए।
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