सीतामढ़ी :~ वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस का नंबर हुआ चेंज, सुपरफास्ट ट्रेन अब हुआ एक्सप्रेस ट्रेन

Dec 9, 2025 - 05:20
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सीतामढ़ी :~ वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस का नंबर हुआ चेंज, सुपरफास्ट ट्रेन अब हुआ एक्सप्रेस ट्रेन

-- वैशाली सुपरफास्ट ट्रेन का नंबर हुआ चेंज,12553/12554 अब वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन को इस 15565/66 नंबर से जाना जाएगा

सागर कुमार, चम्पारण टुडे (सीतामढ़ी ब्यूरो)

सीतामढ़ी :- उत्तर बिहार की शान कही जाने वाली वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस आज से इतिहास के एक नए मोड़ पर पहुंच गई। 1973 में जयंती जनता सुपरफास्ट एक्सप्रेस के रूप में अपनी भूमिका निभाकर देश की चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में अपनी पहचान बनाने वाली यह ट्रेन अब सुपरफास्ट की श्रेणी से बाहर हो गई है। लगभग 52 वर्षों तक ‘सुपरफास्ट’ का दर्जा लेकर चलने वाली इस प्रतिष्ठित ट्रेन को रेलवे ने सामान्य एक्सप्रेस के रूप में डाउन ग्रेड कर दिया है। इसके साथ ही वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस का ट्रेन नंबर 12553/12554 बदलकर अब 15565/15566 वैशाली एक्सप्रेस कर दिया गया है। यानी यह ट्रेन आधिकारिक रूप से सुपरफास्ट की श्रेणी से बाहर मानी जाएगी। जिसकी पुष्टि सीपीआरओ आर के प्रसाद ने की है। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन कभी बरौनी से परिचालन करती थी, अब यह ट्रेन ललित ग्राम से चल रही है।

सुपरफास्ट एक्सप्रेस की विशेषता :-

सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का नंबर 12, 22, 20 अंक से शुरू होती है। सुपरफास्ट एक्सप्रेस की गति तेज़ होती है। इसकी औसत गति 55 किमी/घंटा से अधिकतम से 100 किमी/घंटा तक या अधिक मान्य होता है। एक्सप्रेस ट्रेन की अनुपात में सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव काफी कम स्टेशनों पर होता है। बल्कि यूं कहे कि सुपरफास्ट एक्सप्रेस का महत्वपूर्ण जंक्शन एवं बड़े शहरों के स्टेशनों पर ही ठहराव स्वीकृत की जाती है। सुपर फास्ट एक्सप्रेस ट्रेन को रेल मार्ग पर अधिक प्राथमिकता मिलती है। ऐसे ट्रेन के भाड़े मे एक्सप्रेस ट्रेन के भाड़ा के अलावा सुपरफास्ट सरचार्ज जुड़ता है। अब ‘सुपरफास्ट’ टैग हटने से यात्रियों का किराया तो थोड़ा सस्ता होगा, लेकिन ट्रेन की सेवा गुणवत्ता और गति पर और गिरावट का खतरा बना रहेगा। 

किराये में कितना होगा फर्क :-

बरौनी से नई दिल्ली के बीच सुपरफास्ट एक्सप्रेस एवं एक्सप्रेस के भाड़े में अंतर - 52 वर्षों की गौरवशाली यात्रा वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस का परिचालन 1973 में जयंती जनता सुपरफास्ट के नाम से हुआ था। इस ट्रेन को तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र ने 31 अक्टूबर 1973 को समस्तीपुर से हरी झंडी दिखाई थी। शुरुआत में यह ट्रेन समस्तीपुर से गोरखपुर होकर लखनऊ तक सप्ताह में 4 दिन चलती थी। बाद में इसका परिचालन मुजफ्फरपुर से और बाद मे बरौनी जंक्शन से नई दिल्ली तक किया गया। अब यहीं ट्रेन ललित ग्राम से चल रही है।साफ सफाई, यात्री सुविधा एवं अपने नियत समय से चलने के लिए लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल कर चुके वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस हमेशा से राजनीतिक लोलुपता को लेकर चर्चा में रहा। कोसी क्षेत्र के लोगों के डिमांड पर 2019 में इस ट्रेन का विस्तार सहरसा जंक्शन तक और बीते वर्ष ललितग्राम स्टेशन तक कर दिया गया था।

क्यों छीना गया सुपरफास्ट का दर्जा :- रेलवे सूत्रों के मुताबिक कई वर्षों में इस ट्रेन का रूट,ठहराव और परिचालन दूरी लगातार बढ़ता गया। पहले जहां वैशाली सुपरफास्ट नई दिल्ली तक मे मात्र 14 स्टेशनों पर रुकती थी, राजनीतिक और क्षेत्रीय मांगों पर इसके ठहराव बढ़कर 29 स्टेशन हो गए। बार-बार के विस्तार, ठहराव में बढ़ोतरी और धीमी औसत गति के कारण यह ट्रेन अब सुपरफास्ट के मानकों पर खरी नहीं उतरती थी। साफ-सफाई व सेवा गुणवत्ता में गिरावट से भी यह ट्रेन धीरे-धीरे अपने पुराने गौरव से दूर होती चली गई। 

सुपरफास्ट का भाड़ा की भाड़ा :-

स्लीपर - 580, थ्री ई -1415 , थ्री एसी 1515 , टू एसी -2150 ,फ़र्स्ट क्लास एसी- 3620 रही। 

बरौनी से नई दिल्ली के बीच एक्सप्रेस का भाड़ा स्लीपर - 550, थ्री ई - 1365, थ्री एसी-1465 , टू एसी -2100, फ़र्स्ट क्लास एसी-3540 यानी प्रत्येक श्रेणी में लगभग 40–80 तक की कमी। वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस कभी उत्तर बिहार का गौरव कहलाती थी। समय के साथ बढ़ते ठहराव, राजनीतिक हस्तक्षेप और सेवा गुणवत्ता में गिरावट ने इसे सुपरफास्ट श्रेणी से बाहर कर दिया। अब चुनौती यह है कि सामान्य एक्सप्रेस बन चुकी यह ट्रेन अपनी पुरानी विश्वसनीयता और समयपालन को बरकरार रख सके।

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