सीतामढी :- किसानों उर्वरक उपलब्ध कराने जैसी अन्य मांगों को लेयर समाहरणाय पर घटना - प्रदर्शन की तारीख हुई तय

सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,, सीतामढ़ी :- जिले के सिरौली, बलुआ हनुमाननगर तथा रामनगरा में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में किसानों की एक सभा बैठक आयोजित की गई। जहां सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर सीतामढी को सूखाग्रस्त जिला घोषित कर सभी खेतीहरों को नकद सहायता देने,किसान.......

Sep 6, 2025 - 18:48
Sep 6, 2025 - 18:53
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सीतामढी :-  किसानों उर्वरक उपलब्ध कराने जैसी अन्य मांगों को लेयर समाहरणाय पर घटना - प्रदर्शन की तारीख हुई तय

-- नेताओं को पेंशन तो अन्नदाता को पेंशन क्यों नहीं

-- जबरन भूमिअधिग्रहण पर रोक लगे।

सागर कुमार, चम्पारण टुडे, ,, सीतामढ़ी ब्यूरो,,

सीतामढ़ी :- जिले के सिरौली, बलुआ हनुमाननगर तथा रामनगरा में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में किसानों की एक सभा बैठक आयोजित की गई। जहां सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर सीतामढी को सूखाग्रस्त जिला घोषित कर सभी खेतीहरों को नकद सहायता देने,किसान सम्मान योजना की राशि दोगुनी करने तथा 60वर्ष से उपर के किसान-मजदूरों को दस हजार रू मासिक पेंशन देने की मांग की गई। कृषि विभाग के ताल-मेल से उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने तथा उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की गई।

इन ज्वलंत सवालों पर 15 सितम्बर को समाहरणालय पर किसानों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने का भी निर्णय लिया गया। सिरौली के सभा की अध्यक्षता मोर्चा के उपाध्यक्ष अमरेन्द्र राय, हनुमाननगर की बैठक की महेन्द्र सिंह, बलुआ की रामलखन सिंह तथा रामनगरा की किसान नेता तथा मुखिया राजकिशोर सिंहकहा ने की।

इस आयोजन को मोर्चा के उतर बिहार संयोजक डा.आनन्द किशोर, डूमरा ईकाई के अध्यक्ष अबधेश यादव तथा जिला सचिव अश्विनी मिश्र जिसमें ने संबोधित किया तथा बडी संख्या में 15 सितम्बर को डूमरा पहुंचने का आह्वान किया।

वरिषठ किसान नेता डा.आनन्द किशोर ने सभा तथा बैठकों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते मौसम से किसानो की तबाही बढी है, खेती-किसानी की सुरक्षा हेतू अन्नदाता के किसान सम्मान की राशि में बढोतरी तथा किसान पेंशन योजना लागू करे सरकार। जब सांसद-विधायक मनमाने ढंग से कई-कई पेंशन ले सकता है तो दिन भर धूप-गर्मी तथा प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाले किसानो को पेंशन क्यों नही मिलेगा? जब बडें-बडे पूंजीपतियों का 16 लाख करोड माफ हो सकता है फिर किसानो का कर्ज माफ क्यों नही हो सकता, 75% किसान - मजदूर सरकारी उपेक्षा कबतक सहते रहेंगे। बिहार की तश्वीर यही है कि मजदूरों को वाजिब काम तथा मजदूरी नही मिलता वह परिवार छोड बडे शहरों में पलायन कर रहा है ?किसान अनाज, गन्ना, फल-शब्जी के दाम, सिंचाई,पीने के पानी के लिए तरस रहें हैं। यूरिया डीएपी के लिए लाठी खा रहे हैं। कारपोरेट हित में किसानो की जमीन जबरन छीनी जा रही है। नेता हमारी गाढी कमाई पर ऐश कर कारपोरेट की लठैती कर रहे हैं। किसान पुन: पूरे देश में बडे किसान आन्दोलन की तैयारी कर रहा है।

अध्यक्ष अमरेन्द्र राय ने किसान आन्दोलन की मजबूती के लिए 15 सितम्बर को डूमरा पहुंचकर निर्णायक संघर्ष की अपील की। सभा को ओमप्रकाश,चन्देश्वर प्रसाद सिंह, विजय राय, गगनदेव पंडित, गणेश शर्मा, बद्री राम,अमित ठाकुर,शंभू राय,महेन्द्र सिंह,विवेक कुमार, सत्येन्द्र कुमार, गौरीशंकर कुमार, बिहारी सिंह, अखिलेश कुमार, मांझी राय, उदय सिंह, महेन्द्र राय, संजय सिंह, मांझी राय, सियाराम सिंह, जयनाथ सिंह सहित दर्जनों किसानों ने संबोधित किया तथा किसान आन्दोलन में डूमरा जुटने का संकल्प व्यक्त किया।

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